कोलकाता : मिड-डे मील में अंडा फिर से शामिल किए जाने के फैसले पर बंगाल में सियासत तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने इसे अपनी "नैतिक और वैचारिक जीत" बताते हुए दावा किया कि बच्चों के पोषण के मुद्दे पर सरकार को अंततः अपना रुख बदलना पड़ा।
राज्यसभा सांसद डोला सेन ने कहा कि बच्चों के पोषण से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और भोजन के चयन के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की कि "देर आए, दुरुस्त आए", लेकिन आखिरकार सरकार को ममता बनर्जी की राह पर चलते हुए जनहित में फैसला लेना पड़ा।
तृणमूल के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि एक महीने पहले उनकी पार्टी ने मिड-डे मील से अंडा हटाने का विरोध किया था और अब अंडा वापस लाने की घोषणा हुई है। उन्होंने इसे बच्चों के हित में लिया गया फैसला बताया।
टीएमसी विधायक अलिफा अहमद ने भी फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। वहीं कुणाल घोष ने दावा किया कि विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर लगातार सवाल उठाने के कारण सरकार पर दबाव बना। उन्होंने पूछा कि जब अंडा देना ही था, तो उसे पहले हटाया क्यों गया।