कोलकाता : राज्य सहित महानगर में इन दिनों एसआईआर को लेकर आम जनता के बीच भारी भ्रम और आशंका फैल रही है। फॉर्म कैसे भरा जाएगा, तस्वीर देना अनिवार्य है या नहीं इन तमाम सवालों को लेकर आम नागरिक दुविधा में है। इसी डर और भ्रम का फायदा उठाते हुए राज्य में साइबर अपराधी भी सक्रिय हो उठे हैं। बीते कुछ दिनों में महानगर के आसपास के इलाकों से ऐसी कई शिकायतें पुलिस के पास पहुंच चुकी हैं। राज्य पुलिस के साथ ही कोलकाता पुलिस अब लोगों को सतर्क रहने की अपील कर रही है। इसके साथ ही सोमवार की रात कोलकाता पुलिस ने अपने फेसबुक पेज पर चुनाव आयोग का एक बयान साझा किया जिसमें कहा गया आयोग ऑफिस से कभी भी एसआईआर से जुड़े कार्य के लिए किसी तरह का ओटीपी लोगों से नहीं मांगा जाता है।
कैसे हो रही है ठगी?
सूत्रों के मुताबिक, ठगों के हाथ डार्क वेब से कई ग्राहकों के आधार नंबर लग चुके हैं। AEPS के जरिये केवल आधार नंबर से पैसा निकाला जा सकता है, लेकिन इसके लिए ग्राहक के मोबाइल पर आने वाला ओटीपी चाहिए। इसीलिए ठग खुद को सरकारी कर्मी बताकर ओटीपी मांग रहे हैं। ओटीपी मिलते ही वे आसानी से खाते से पैसा निकाल लेते हैं। हालांकि इस तरीके से एक बार में केवल 9,999 रुपये ही निकाले जा सकते हैं। राज्य के कई हिस्सों से ऐसे मामलों की पुष्टि हुई है। यहां उल्लेखनीय है कि बीते कुछ उत्तर 24 परगना जिले के कई इलाकों में लोगों ने एसआईआर के नाम ओटीपी मांगे जाने की शिकायत की थी। लोगों ने बताया कि कभी बीएलओ को आयोग ऑफिस की कहकर उनसे ओटीपी मांगने की कोशिश की गयी थी।
पुलिस की सलाह
एसआईआर से संबंधित किसी भी प्रक्रिया के लिए ओटीपी नहीं पूछा जाता।
किसी अनजान कॉलर को ओटीपी, आधार नंबर, फोटो या बैंक जानकारी न दें।
संदेह होने पर नजदीकी थाना या साइबर सेल से तुरंत संपर्क करें।