कोलकाता : समुद्रों का ‘जलदस्यु’ कहा जाने वाला दुर्लभ आर्कटिक स्कुआ (Arctic Skua) एक बार फिर बंगाल में नजर आया है। रविवार को सुंदरबन में प्राकृतिकविदों और पर्यटकों ने इस पक्षी को देखा। बंगाल में इस प्रजाति की यह दूसरी दर्ज की गई मौजूदगी है, जिससे पक्षी प्रेमियों और विशेषज्ञों में खासा उत्साह है।
दूसरे पक्षियों से छीनता है भोजन
आर्कटिक स्कुआ की पहचान उसके अनोखे भोजन जुटाने के तरीके से होती है। यह खुद शिकार करने के बजाय अक्सर गुल, टर्न और दूसरे समुद्री पक्षियों का पीछा कर उनसे मछली या भोजन छिनता है।
इसके बाद तेजी से झपट्टा मारकर गिरा हुआ भोजन उठा लेता है। इस व्यवहार को वैज्ञानिक भाषा में ‘क्लेप्टोपैरासिटिज्म’ कहा जाता है। इसी आदत के कारण इसे ‘पाइरेट बर्ड’ यानी जलदस्यु पक्षी भी कहा जाता है।
जानकारी के अनुसार, देश के पश्चिमी तट पर इस पक्षी के रिकॉर्ड मिलते रहे हैं, जबकि पूर्वी तट पर इसकी मौजूदगी बेहद दुर्लभ है। इससे पहले अक्टूबर 2019 में आर्कटिक स्कुआ की मौजूदगी देखी गई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्कुआ मानसून और मानसून के बाद के दौर में कभी-कभार प्रवासी पक्षी के रूप में बंगाल के डेल्टा क्षेत्र में पहुंचता है। यह लंबी दूरी तय करने वाला पक्षी है, जो उत्तरी गोलार्ध के स्कैंडिनेविया, स्कॉटलैंड, आइसलैंड, ग्रीनलैंड, कनाडा, अलास्का और साइबेरिया जैसे इलाकों में प्रजनन करता है और सर्दियां दक्षिणी गोलार्ध में बिताता है।