कोलकाता : महानगर के विभिन्न जैन मंदिरों में जैन समाज का सबसे बड़ा त्योहार पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व अत्यंत भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर समाज के लोगों ने वर्षभर में मन, वचन और काया से हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा याचना कर आत्म शुद्धि का संदेश दिया।
श्री त्रिभुवन जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ, कोलकाता के समस्त ट्रस्टी और श्रावक-श्राविकाओं ने मिलकर क्षमापना पर्व मनाया। वहीं, श्री वर्द्धमान जैन संघ में पार्श्वचंद्रगच्छीय संवत्सरी प्रतिक्रमण का आयोजन हुआ।
इस दौरान बारसा सूत्र वांचन, चित्र दर्शन और चैत्य परिपाटी जैसे धार्मिक कार्यक्रमों से श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।इस पवित्र मौके पर मुनि रविन्द्र विजय महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कटु शब्दों के बाण कांच की तरह हृदय को ठेस पहुंचाते हैं।
उन्होंने क्षमापना को परस्पर मैत्री और सद्भावना का सबसे बड़ा साधन बताया। मुनि श्री ने जोर देकर कहा कि सभी जीवों से मित्रता रखना ही पर्युषण का असली संदेश है और क्षमा मांगना व देना ही मानव जीवन की सच्ची सार्थकता है।