IOCL को भी देना पड़ रहा है 2,000 से 3,500 रुपये प्रति टन तक डिस्काउंट
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : असम और पश्चिम बंगाल की सीमा पर श्रीरामपुर चेकपोस्ट के पास रॉ पेट्रोलियम कोक (RPC) से लदे 300 से अधिक ट्रक पिछले 45 दिनों से फंसे हुए हैं। 17 सितंबर से जारी इस गतिरोध का अब तक समाधान नहीं निकल पाया है। ट्रकों के साथ मौजूद GST-पेड इनवॉइस, ई-वे बिल और चालान के बावजूद माल की निकासी नहीं हो रही है। अधिकारियों की ओर से केवल ‘ऊपर से आदेश’ का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई लिखित आदेश सामने नहीं आया है। इस गतिरोध का सबसे अधिक असर ट्रक ड्राइवरों पर पड़ रहा है। दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली परिवार से दूर सड़क किनारे बिताने के बाद अब छठ महापर्व भी उनके लिए परेशानी लेकर आया है। अधिकांश ड्राइवर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। घर जाने की आस लगाए बैठे ड्राइवरों में भारी आक्रोश है। कई ड्राइवर ट्रक खाली कर घर लौट चुके हैं, जबकि अन्य भी माल उतारकर वापस जाने की बात कह रहे हैं।हालांकि, खुले मैदान में RPC उतारने से माल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। संबंधित पक्षों के अनुसार, इस प्रक्रिया में 8 से 10 प्रतिशत तक माल की कमी और 2 से 3 प्रतिशत तक राख (ऐश) की मिलावट हो सकती है।
उद्योगों पर मंडराया उत्पादन ठप होने का खतरा
RPC की आपूर्ति बाधित होने से ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड बनाने वाली ग्रेफाइट इंडिया और एचईजी जैसी कंपनियों के सामने कच्चे माल का संकट गहराने लगा है। ये कंपनियां बड़े पैमाने पर निर्यात करती हैं। असम की रिफाइनरियों से RPC की आपूर्ति नहीं होने पर इनके उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने और कामकाज ठप होने का खतरा पैदा हो गया है। वहीं, हल्दिया स्थित पेट्रो कार्बन एंड केमिकल्स भी इस संकट से प्रभावित है। कंपनी असम की रिफाइनरियों से उच्च गुणवत्ता वाली RPC लेकर कैल्सिन्ड पेट्रोलियम कोक (CPC) तैयार करती है, जिसकी आपूर्ति नालको को की जाती है। RPC की कमी के कारण कंपनी NALCO के चालू ऑर्डर (Standing PO) के अनुरूप आपूर्ति नहीं कर पा रही है।
IOCL को भी उठाना पड़ रहा राजस्व नुकसान
इस गतिरोध का असर सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) पर भी पड़ रहा है। सड़क मार्ग से माल बाहर नहीं निकल पाने के कारण असम की रिफाइनरियों में RPC का स्टॉक जमा हो रहा है। IOCL की गुवाहाटी रिफाइनरी को RPC बेचने के लिए खरीदारों को प्रति टन 2,000 से 3,500 रुपये तक की छूट देनी पड़ रही है। यह छूट 23 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक लागू है। इससे सरकारी कंपनी को सीधे राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है।
तीन सप्ताह बाद भी नहीं मिला आश्वासन का लाभ
ट्रक मालिकों और संबंधित उद्योगों की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, IOCL चेयरमैन, पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारियों से लिखित अपील की जा चुकी है। 9 अक्टूबर को कमिश्नर, कमर्शियल टैक्स की ओर से एक-दो दिनों में ट्रकों को छोड़ने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन तीन सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी ट्रक सीमा पर खड़े हैं। अब सवाल यह है कि वैध दस्तावेजों के साथ GST-पेड माल लेकर चल रहे सैकड़ों ट्रकों की निकासी आखिर कब होगी? छठ महापर्व से पहले समाधान नहीं निकलने पर चालकों की परेशानी और उद्योगों का संकट और गहराने की आशंका है।