उक्त पुलिस कर्मी के खिलाफ चल रही है विभागीय जांच
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोलकाता पुलिस के एक ट्रैफिक सार्जेेंट से मोबाइल टॉवर लोकेशन हासिल कर झारखंड में होटल कारोबारी निखिल सबलोक की हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में कोलकाता पुलिस के एक सार्जेंट और एक सिविक वॉलेंटियर की गिरफ्तारी के बाद अब लालबाजार का एक और पुलिस अधिकारी जांच के दायरे में आ गया है। झारखंड पुलिस की विशेष जांच टीम द्वारा नाम उजागर किए जाने के बाद अब लालबाजार ने भी संबंधित अधिकारी के खिलाफ आंतरिक जांच शुरू कर दी है।
यूं रचा गया हत्या का पूरा षड्यंत्र
मामले की जांच कर रही झारखंड पुलिस की एसआईटी के अनुसार, इस हत्या का मुख्य सूत्रधार अशोक सिंह राघव है, जो जमशेदपुर में एक छोटा टीवी चैनल चलाता था। सोशल मीडिया के जरिए उसने कोलकाता पुलिस की सिविक वॉलेंटियर ट्विंकल दास से दोस्ती की, जो बाद में प्रेम संबंधों में बदल गई। राघव ने ट्विंकल का इस्तेमाल कर बेलियाघाटा ट्रैफिक गार्ड के सार्जेंट अयान गुप्ता से संपर्क साधा। जांच में सामने आया कि हत्या से पहले सार्जेंट अयान ने लालबाजार के डिटेक्टिव विभाग में तैनात अपने एक परिचित अधिकारी से होटल मालिक का टॉवर लोकेशन हासिल किया। अधिकारी को यह झांसा दिया गया था कि एक व्यक्ति रिश्तेदार की पत्नी को फोन कर परेशान कर रहा है और उसकी लोकेशन जानना जरूरी है। इसके अलावा, राघव ने यह भी बहाना बनाया था कि वह पत्रकार के रूप में होटल मालिक का इंटरव्यू लेना चाहता है। लोकेशन मिलते ही सुपारी किलरों को जानकारी दे दी गई।
9 गोलियां मारकर की गई थी हत्या
गौरतलब है कि बीते 24 अगस्त को होटल कारोबारी निखिल सबलोक की झारखंड के चांडिल थाना अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-33 स्थित एक होटल के बाहर 9 गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच के दौरान एसआईटी ने पहले 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनसे पूछताछ में कोलकाता पुलिस के कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई।
नियमों की अनदेखी पर लालबाजार सख्त
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी नागरिक या अधिकारी का टॉवर लोकेशन इस तरह अनधिकृत रूप से साझा नहीं किया जा सकता। एसआईटी को यह भी जानकारी मिली है कि आरोपी सार्जेंट और सिविक वॉलेंटियर पहले भी कई बार अशोक सिंह राघव को अलग-अलग कारणों से टॉवर लोकेशन भेज चुके हैं। फिलहाल लालबाजार के जासूस आरोपी अधिकारी से पूछताछ कर रहे हैं ताकि पता लगाया जा सके कि उन्होंने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किस हद तक किया है।