फाइल फोटो 
कोलकाता सिटी

अंतरराज्यीय 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़, मुख्य अभियुक्त गिरफ्तार

वेलफेयर ट्रस्ट की आड़ में करते थे ठगी की रकम की हेराफेरी

कोलकाता : पश्चिम बंगाल साइबर क्राइम विंग ने देश के कई राज्यों में फैले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। यह सिंडिकेट बड़े पैमाने पर भोले-भाले लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार बना रहा था। इस मामले में पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना को गिरफ्तार किया हैं। अभियुक्त का नाम तापस मन्ना है। वह पेशे से एडवोकेट है और एक वेलफेयर ट्रस्ट से जुड़ा हुआ है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के इनपुट पर हुई कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिले खुफिया इनपुट्स और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज देशव्यापी शिकायतों के आधार पर यह जांच शुरू की गई थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल साइबर क्राइम विंग के एनसीआरपी सेल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्यमग्राम थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

3.85 करोड़ का फर्जीवाड़ा, कंबोडिया-म्यांमार से जुड़े तार

जानकारी के अनुसार अब तक की जांच में करीब 3.85 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और लेन-देन का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने जिस बैंक खाते को फ्रीज किया है, वह देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 41 एनसीआरपी शिकायतों और 10 से अधिक एफआईआर से जुड़ा हुआ है। शुरुआती खुफिया जानकारी से यह भी संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क के तार कंबोडिया और म्यांमार में बैठे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों से जुड़े हो सकते हैं।

ट्रस्ट के नाम पर चल रहा था मनी लॉन्ड्रिंग का खेल

जांच के दौरान पुलिस ने मुर्शिदाबाद के जंगीपुर स्थित प्राइवेट बैंक में 'विवेकानंद वेलफेयर ट्रस्ट' के नाम पर चल रहे एक खाते की पहचान की। इस खाते का इस्तेमाल 'डिजिटल अरेस्ट' से ठगे गये पैसों को डायवर्ट करने और उसे ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था। अकेले पश्चिम बंगाल के तीन पीड़ितों से करीब 25 लाख रुपये इसी खाते में ट्रांसफर करवाए गए थे।

मेट्रो शहर के एक होटल से ऑपरेट कर रहा था अभियुक्त वकील

साइबर विंग ने 21 मई 2026 को इस घोटाले के मुख्य अभियुक्त और 'विवेकानंद वेलफेयर ट्रस्ट' के सचिव एडवोकेट तापस मन्ना को गिरफ्तार कर लिया। मन्ना इस फर्जी बैंक खाते को पूरी तरह नियंत्रित कर रहा था और अंतरराज्यीय नेटवर्क के अन्य सदस्यों के साथ तालमेल बिठा रहा था। जांच में सामने आया है कि वारदात के दौरान वह दूसरे राज्य के एक बड़े मेट्रो शहर के होटल में छिपकर इस पूरे खेल को ऑपरेट कर रहा था। पुलिस अब पैसों के लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य मददगारों, बैंक खाताधारकों और मुख्य मास्टरमाइंड्स का पता लगाकर पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद किया जा सके।

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