राम बालक दास, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पहली बार राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी) द्वारा आयोजित की जा रही ‘ईको-फ्रेंडली पूजा पंडाल्स विथ जूट’ प्रतियोगिता को लेकर कोलकाता की दुर्गापूजा समितियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। समितियों की मांग पर एनजेबी ने आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर अब 21 सितंबर कर दी है। इच्छुक समितियाँ एनजेबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण फॉर्म भर सकती हैं। इस प्रतियोगिता का आयोजन वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय जूट बोर्ड द्वारा किया जा रहा है। इसका संचालन एनजेबी के सचिव और सीईओ शशि भूषण सिंह (आईआरटीएस) के नेतृत्व में किया जा रहा है। कोलकाता में इस प्रकार की पहल पहली बार हो रही है, जिसे दुर्गापूजा आयोजकों द्वारा सराहना मिल रही है। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक पूजा पंडालों को अधिक पर्यावरण-संवेदनशील बनाना है। इस विशेष प्रतियोगिता के तहत कोलकाता क्षेत्र की दुर्गापूजा समितियों को पंडालों की सजावट में प्राकृतिक, बायोडिग्रेडेबल और टिकाऊ जूट सामग्री के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे न केवल सजावट में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी फैलेगी। दुर्गा पूजा की सजावट में प्राकृतिक व पर्यावरण के अनुकूल जूट का प्रयोग बढ़ाना, जूट की रचनात्मक और कलात्मक संभावनाओं को उजागर करना। सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना और पूजा समितियों को इको-फ्रेंडली प्रथाओं की ओर प्रेरित करना। त्योहारों के माध्यम से जूट उत्पादों की मांग और जागरूकता बढ़ाना। ऐसे पूजा पंडालों को सम्मानित करना जो कला और सततता का सुंदर संयोजन प्रस्तुत करें। नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना और दैनिक जीवन में इको-फ्रेंडली विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना।
प्रतियोगिता में भाग लेने की शर्तें :
प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए यह अनिवार्य है कि पंडालों में कम से कम निम्नलिखित में से किसी एक या अधिक जूट उत्पादों का उपयोग किया जाए—200 मीटर जूट फैब्रिक, 25 किलोग्राम जूट यार्न, या 25 किलोग्राम कच्चा जूट। इनका कोई उपयुक्त संयोजन भी मान्य होगा।एनजेबी की इस पहल का उद्देश्य न केवल जूट उद्योग को समर्थन देना है, बल्कि पूजा आयोजनों को ईको-फ्रेंडली दिशा में ले जाना भी है। आयोजक इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।