कोलकाता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रहस्यमय ढंग से लापता होने के अनसुलझे रहस्य पर आधारित बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक फिल्म 'द बोस फाइल्स – सच या साज़िश' की आधिकारिक घोषणा रविवार को कोलकाता में की गई। लंबे समय तक चली प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) प्रक्रिया पूरी होने और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से स्वीकृति मिलने के बाद अब फिल्म की देशव्यापी रिलीज का मार्ग प्रशस्त हो गया है। फिल्म 31 जुलाई 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।
घोषणा समारोह में फिल्म के निर्देशक राजेश गुप्ता, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भूमिका निभाने वाले अभिनेता यतीन कार्येकर तथा फिल्म में मंडल की भूमिका निभाने वाले अभिनेता राजीव कुमार अनेजा उपस्थित रहे। इस दौरान फिल्म निर्माताओं ने बताया कि सेंसर बोर्ड की मंजूरी हासिल करने से पहले फिल्म को कई चरणों की विस्तृत समीक्षा और परीक्षण प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। उन्होंने इसे फिल्म की यात्रा का महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पड़ाव बताते हुए कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद दर्शकों तक इस कहानी को पहुंचाने का उनका संकल्प अडिग रहा और आखिरकार उसी दृढ़ता के कारण फिल्म अब बड़े पर्दे तक पहुंचने में सफल हुई है।
निर्देशक राजेश गुप्ता के निर्देशन में बनी यह पीरियड ड्रामा प्रख्यात लेखक अनुज धर और चंद्रचूड़ घोष के वर्षों के गहन शोध पर आधारित है। फिल्म भारत के इतिहास के सबसे चर्चित और अब तक अनसुलझे रहस्यों में से एक—नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लापता होने—की पड़ताल करती है। इसकी कहानी वीराली प्रसाद नामक एक दृढ़ निश्चयी युवती और खोजी पत्रकार अनुज गुप्ता के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दो दशकों से अधिक समय तक नेताजी के रहस्यमय गायब होने की सच्चाई सामने लाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। गोपनीय दस्तावेज़ों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों, ऐतिहासिक अभिलेखों और विभिन्न साक्ष्यों के माध्यम से फिल्म इस ऐतिहासिक रहस्य को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है और स्थापित धारणाओं को चुनौती देती है।
निर्देशक राजेश गुप्ता ने कहा, "यह फिल्म केवल इतिहास को दोहराने का प्रयास नहीं है, बल्कि उन सवालों को सामने लाने की कोशिश है जिन्हें पीढ़ियों से पूछा जाता रहा है। हमारा उद्देश्य दर्शकों को तथ्यों को नए नजरिए से देखने और इतिहास पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करना है। तमाम चुनौतियों को पार कर इस मुकाम तक पहुंचना हमारी पूरी टीम के लिए गर्व और भावनाओं से भरा क्षण है।"
फिल्म निर्माताओं का मानना है कि 'द बोस फाइल्स – सच या साज़िश' सिर्फ एक ऐतिहासिक फिल्म नहीं, बल्कि भारत के सबसे चर्चित ऐतिहासिक विमर्शों में से एक को नए सिरे से समझने का प्रयास है। वर्षों के शोध, तथ्यपरक प्रस्तुति और प्रभावशाली कहानी कहने की शैली के साथ यह फिल्म नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करती है। 31 जुलाई को रिलीज़ होने वाली यह फिल्म दर्शकों को इतिहास के सबसे बड़े अनसुलझे रहस्यों में से एक पर नए सिरे से सोचने और अपनी राय बनाने का अवसर देगी।