कोलकाता : जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कोलकाता नगर निगम (केएमसी) मुख्यालय में लोगों की बढ़ती भीड़ और लंबी कतारों को देखते हुए निगम प्रशासन ने व्यवस्था में सुधार की पहल की है।
केएमसी कमिश्नर एवं सिविक एडमिनिस्ट्रेटर स्मिता पांडे ने सोमवार को स्वास्थ्य विभाग का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खुद आम लोगों के बीच कतार में खड़े होकर उनकी परेशानियों को समझा और अधिकारियों को जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने वाले काउंटरों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया।
करीब 20 मिनट तक कतार में रहकर उन्होंने दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया और काउंटरों की कार्यप्रणाली का जायजा लिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा।
नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों के लंबित आवेदनों की है। अधिकारियों के मुताबिक, केएमसी के पास ऐसे 30 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं। इसकी प्रमुख वजह राज्य सरकार के 'जन्मो मृत्यु तथ्य' पोर्टल में बार-बार आने वाली तकनीकी समस्याएं और केएमसी के चैटबॉट की धीमी कार्यप्रणाली बताई जा रही है।
डिजिटल प्रमाणपत्र डाउनलोड करने के लिए आवेदकों को चैटबॉट के माध्यम से आवेदन करना पड़ता है। कई बार पोर्टल पर आवेदन पूरी तरह बंद हो जाते हैं या प्रतिदिन केवल चार-पांच आवेदन ही स्वीकार किए जाते हैं।
जन्म प्रमाणपत्र की जरूरत स्कूलों में दाखिले, पासपोर्ट के नवीनीकरण और अन्य आधिकारिक कार्यों में पड़ती है। ऐसे में देरी से लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। इसके अलावा, प्रमाणपत्रों की मंजूरी का अधिकार एक निर्धारित निगम अधिकारी तक सीमित किए जाने से भी प्रक्रिया प्रभावित हुई है। पहले यह काम विभिन्न बोरो स्तर के कार्यालयों में विकेंद्रीकृत तरीके से होता था।
गौरतलब है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कथित अनियमितताओं और फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी होने के आरोपों के बाद कोलकाता पुलिस और राज्य स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की थी।
बोरो नंबर-1 सहित विभिन्न स्थानों पर छापेमारी भी की गई। प्रमाणपत्रों में देरी का फायदा उठाकर कथित तौर पर बिचौलिये लोगों से पैसे मांग रहे हैं। ऐसे में काउंटरों की संख्या बढ़ाने और प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश को आम नागरिकों की परेशानी कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।