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कोलकाता सिटी

सड़क नहीं, अब नदी बनेगी मरीजों के लिए लाइफलाइन

दूरदराज के मरीजों को मिलेगी तेज चिकित्सा सुविधा

मधुर, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : सुंदरवन और राज्य के अन्य नदी-बहुल दूरदराज इलाकों में गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने की समस्या अब काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य भवन ने जलमार्ग के जरिए मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए रिवर यानी वॉटर एंबुलेंस सेवा शुरू करने की योजना बनाई है। राज्य सरकार की 100 दिनों की उपलब्धियों और विभाग की आगामी कार्ययोजना की जानकारी देते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने योजना को खास तौर पर नदी और द्वीपों से घिरे इलाकों के लिए महत्वपूर्ण बताया। पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सड़क मार्ग से कटे और नदी-तटीय इलाकों तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए फ्लोटिंग मेडिकल यूनिट, स्पीडबोट एंबुलेंस और मोबाइल मेडिकल यूनिट को जोड़कर त्रिस्तरीय जल-थल स्वास्थ्य नेटवर्क तैयार किया है। इसका उद्देश्य मरीज को केवल नदी पार कराना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर नदी के बीच ही जांच और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रारंभिक चरण में दो फ्लोटिंग मेडिकल यूनिट तैयार हैं और इन्हें तत्काल सेवा में लगाया जा रहा है। इसके अलावा अगले 45 दिनों में छह और फ्लोटिंग यूनिट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। दुर्गम खाड़ियों और द्वीपों से मरीजों को तेजी से निकालने के लिए छह आधुनिक स्पीडबोट एंबुलेंस के भी ऑर्डर दिए गए हैं।

नदी में ही होगा ‘मिनी अस्पताल’

फ्लोटिंग मेडिकल यूनिट को सामान्य नाव या सिर्फ मरीजों को ढोने वाले वाहन के तौर पर नहीं, बल्कि मिनी अस्पताल के रूप में तैयार किया गया है। इन यूनिटों में अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मरीज की शुरुआती जांच नदी में ही की जा सकेगी, जिससे गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने से पहले इलाज शुरू किया जा सकेगा। इन यूनिटों में पोर्टेबल और हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासोनोग्राफी, ऑटो-एनालाइजर के जरिए रक्त जांच, ईसीजी और ईकोकार्डियोग्राफी जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी यानी मरीज को छोटी-मोटी जांच के लिए पहले अस्पताल पहुंचने की जरूरत नहीं होगी। डॉक्टर मौके पर ही जांच के आधार पर उपचार और आगे की चिकित्सा रणनीति तय कर सकेंगे।

डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ रहेंगे तैनात

हर फ्लोटिंग मेडिकल यूनिट पर योग्य डॉक्टर के साथ नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि इन यूनिटों में स्थानीय डॉक्टरों और नर्सों को प्राथमिकता दी जाए। इससे स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनी रहेगी और कर्मचारियों के बार-बार तबादले से पैदा होने वाली परेशानी को कम किया जा सकेगा। यूनिटों को पूरी तरह एयर-कंडीशंड बनाया गया है। इसका उद्देश्य मरीजों को आरामदायक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ संवेदनशील मेडिकल और डायग्नोस्टिक उपकरणों को भी सुरक्षित तापमान में रखना है।

फेयरली प्लेस घाट से सुंदरबन की ओर रवाना

फ्लोटिंग मेडिकल यूनिटों का निरीक्षण कोलकाता के फेयरली प्लेस घाट पर किया गया। यहां से इन यूनिटों को सुंदरबन के विभिन्न जलक्षेत्रों में भेजा जा रहा है। स्वास्थ्य भवन सूत्रों के अनुसार दो यूनिटों को तत्काल प्रभाव से संचालन में लाया जा रहा है, जबकि बाकी छह यूनिट अगले 45 दिनों के भीतर तैयार कर सक्रिय करने का लक्ष्य है। हालांकि सुंदरबन में ज्वार-भाटा और जलस्तर सेवा संचालन में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से इन यूनिटों का संचालन स्थानीय टाइड शेड्यूल को ध्यान में रखकर किया जाएगा। प्रस्तावित तौर पर यूनिटें मुख्य रूप से सुबह 9 बजे से शाम 5-6 बजे तक संचालित होंगी, ताकि कम पानी के दौरान संकरी खाड़ियों में नाव के फंसने का जोखिम कम किया जा सके।

स्पीडबोट एंबुलेंस करेगी मरीजों को रेस्क्यू

इस पूरी व्यवस्था में स्पीडबोट एंबुलेंस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। सुंदरबन की कई खाड़ियां इतनी संकरी हैं कि बड़ी नाव या सामान्य एंबुलेंस वहां आसानी से नहीं पहुंच सकती। ऐसे में छह आधुनिक स्पीडबोट एंबुलेंस को मरीजों के त्वरित रेस्क्यू और ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। किसी द्वीप या संकरी खाड़ी में मरीज के बीमार पड़ने या आपात स्थिति में होने की सूचना मिलने पर स्पीडबोट एंबुलेंस मौके तक पहुंचेगी। वहां से मरीज को निकालकर नदी में तैनात फ्लोटिंग मेडिकल यूनिट तक लाया जाएगा।

नदी में ही शुरू होगी जांच और प्राथमिक चिकित्सा

मरीज के फ्लोटिंग मेडिकल यूनिट तक पहुंचने के बाद डॉक्टर उसकी तत्काल जांच करेंगे। जरूरत के अनुसार रक्त जांच, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, ECG या Echo जैसी जांच की जा सकेंगी। इसके आधार पर मरीज को प्राथमिक और आपातकालीन उपचार दिया जाएगा। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अस्पताल तक पहुंचने से पहले ही मरीज की मेडिकल स्थिति का आकलन शुरू हो जाएगा। गंभीर मरीजों के मामले में इससे आगे के इलाज और रेफरल का फैसला लेने में भी मदद मिलेगी।

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