KMC बिल्डिंग  
कोलकाता सिटी

छह महीने से नहीं हुई KMC की बिल्डिंग कमेटी की बैठक

300 से अधिक रियल्टी प्रोजेक्ट अटके

कोलकाता : कोलकाता नगर निगम (KMC) की म्यूनिसिपल बिल्डिंग कमेटी (MBC) की पिछले छह महीनों से बैठक नहीं होने के कारण शहर में 300 से अधिक रियल एस्टेट प्रोजेक्टों पर काम अटक गया है।

यह कमेटी शहर में कई तरह की निर्माण परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी देने वाली महत्वपूर्ण संस्था है। बैठकें नहीं होने से निर्माण प्रस्तावों की फाइलें लगातार लंबित होती जा रही हैं और डेवलपर्स को परियोजनाओं की मंजूरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

फरवरी से ठप है मंजूरी की प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, MBC की आखिरी बैठक फरवरी में हुई थी। इससे पहले कमेटी आमतौर पर प्रस्तावों की संख्या के आधार पर महीने में दो या उससे अधिक बार बैठक करती थी।

एक अधिकारी के मुताबिक, सामान्य स्थिति में कमेटी हर महीने करीब 50 से 60 परियोजनाओं को मंजूरी देती थी। अब नई परियोजनाओं के प्रस्ताव जमा तो हो रहे हैं, लेकिन उन पर विचार नहीं हो पा रहा है।

लंबित परियोजनाओं में व्यावसायिक निर्माण, 500 वर्ग मीटर के प्लॉट पर बनने वाली आवासीय परियोजनाएं, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और कॉर्नर प्लॉट से जुड़े निर्माण प्रस्ताव शामिल हैं। मंजूरी में देरी से परियोजनाओं की समय-सीमा प्रभावित होने के साथ निवेश, निर्माण कार्यक्रम और रोजगार पर भी असर पड़ने की आशंका है।

प्रशासनिक गतिरोध से डेवलपर्स परेशान

MBC में KMC, KMDA, राज्य अग्निशमन विभाग, पुलिस और वास्तुकारों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। कमेटी से प्रस्ताव मंजूर होने के बाद उन्हें मेयर-इन-काउंसिल के समक्ष रखा जाता है और उसके बाद औपचारिक मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा प्रशासनिक और राजनीतिक परिस्थितियों के बीच कमेटी की बैठक बुलाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। निर्वाचित बोर्ड के भंग होने और मेयर के पद के नहीं होने से संवेदनशील निर्माण प्रस्तावों पर निर्णय लेने में प्रशासनिक हिचकिचाहट की बात भी सामने आई है।

रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि निवेश आकर्षित करने के लिए केवल नीतिगत सुधार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिलना भी जरूरी है।

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