कोलकाता सिटी

शीर्ष 50 जिलों में असंगठित क्षेत्र के करीब एक-तिहाई प्रतिष्ठान, कामगार और जीवीए : सर्वेक्षण

सन्मार्ग संवाददाता

नयी दिल्ली : देश में असंगठित क्षेत्र के प्रतिष्ठानों की संख्या के लिहाज से शीर्ष 50 जिलों में ही इस क्षेत्र के करीब एक-तिहाई प्रतिष्ठान, कामगार और सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) केंद्रित हैं। बृहस्पतिवार को जारी एक सरकारी सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने पहली बार जिला स्तर पर असंगठित क्षेत्र के अनुमान जारी किए हैं। ये अनुमान देशभर में किए गए उद्यम सर्वेक्षण पर आधारित हैं।

असंगठित क्षेत्र के प्रतिष्ठान वे छोटे कारोबारी प्रतिष्ठान होते हैं जो किसी निगमित कंपनी के रूप में गठित नहीं होते और मुख्यतः एकल स्वामित्व या साझेदारी जैसी संरचनाओं में संचालित होते हैं।

सर्वेक्षण के अनुसार, करीब एक-तिहाई जिलों में असंगठित क्षेत्र के एक लाख से अधिक प्रतिष्ठान हैं। वहीं, करीब नौ प्रतिशत जिलों में ऐसे प्रतिष्ठानों की संख्या 10,000 से कम है। प्रतिष्ठानों की अनुमानित संख्या के लिहाज से शीर्ष 10 जिले चार राज्यों गुजरात, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में हैं। इन जिलों में असंगठित क्षेत्र के कुल प्रतिष्ठानों, कामगारों और जीवीए का करीब 10 प्रतिशत केंद्रित है। वहीं, शीर्ष 50 जिले बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे 12 राज्यों में फैले हुए हैं।

सर्वेक्षण के मुताबिक, केवल 16 जिलों में असंगठित क्षेत्र के पांच लाख से अधिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं। इनमें पश्चिम बंगाल के आठ, महाराष्ट्र के तीन, गुजरात के दो तथा कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश का एक-एक जिला शामिल है। सर्वेक्षण में असंगठित क्षेत्र की उत्पादकता में भी जिलावार अंतर सामने आया है। करीब 331 जिलों में प्रति कामगार जीवीए एक लाख से 1.5 लाख रुपये के बीच है, जबकि 280 जिलों में यह अखिल भारतीय औसत 1,56,539 रुपये से अधिक है।

महिला भागीदारी के लिहाज से भी जिलों में उल्लेखनीय अंतर है। देश के 237 जिलों में असंगठित क्षेत्र के कुल कामगारों में महिलाओं की हिस्सेदारी कम-से-कम एक-तिहाई है जबकि 25 जिलों में महिला कामगारों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है। महिलाओं की अगुवाई वाले असंगठित प्रतिष्ठानों की सबसे अधिक हिस्सेदारी वाले 10 जिले तेलंगाना, मणिपुर और मेघालय में हैं। मिजोरम के प्रत्येक जिले में महिला स्वामित्व वाले एकल स्वामित्व प्रतिष्ठानों की हिस्सेदारी कम-से-कम 50 प्रतिशत है। सर्वेक्षण में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के कुछ दुर्गम गांवों को छोड़कर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसमें विनिर्माण, व्यापार और अन्य सेवाओं से जुड़े असंगठित गैर-कृषि प्रतिष्ठानों का सर्वेक्षण किया गया। स्वामित्व के लिहाज से एकल स्वामित्व, साझेदारी (सीमित देयता भागीदारी को छोड़कर), सहकारी समितियों, सोसायटी/ट्रस्ट के अंतर्गत आने वाले असंगठित गैर-कृषि प्रतिष्ठानों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया है।

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