कोलकाता सिटी

कृष्ण जन्मोत्सव के उल्लास में डूबा नया मंदिर बांधाघाट, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

तन-मन-धन के समर्पण से होगा प्रभु से मिलन : पं॰ मालीराम शास्त्री

सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : सलकिया बांधाघाट स्थित बंगेश्वर महादेव नया मंदिर में माघ मास के उपलक्ष्य में श्रद्धेय पं. मालीराम जी शास्त्री के व्यासत्व में आयोजित सप्ताह व्यापी श्रीमद् भागवत महापुराण यज्ञ के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव और नंदोत्सव में उमड़े श्रद्धालुओं के सैलाब से गोकुल-मथुरा का नजारा दिखा। मुख्य यजमान सरोज-दिलीप चौधरी (अनमोल ग्रुप), मुख्य संरक्षक महेश कुमार शर्मा (नेचुरल ग्रुप) व कृष्ण जन्मोत्सव के यजमान श्रीमती संगीता-संजय अग्रवाल (डीजी ग्रुप) के अलावा राधेश्याम सुल्तानिया, डॉ. पवन-ममता अग्रवाल, बिनोद-अनीता केडिया, सुभाष-पुष्पा अग्रवाल, सजन-रेनू तायल, अनंत-रजत शाह, जगदीश अग्रवाल, जितेन्द्र कनोई, महेंद्र सांवलका, प्रदीप अग्रवाल (पलासी), जयप्रकाश अग्रवाल (बेंगलूर), ओमप्रकाश बंसल, उत्तम कुमार जाजू, नैनी- अंकित चौधरी, नैन्सी- आशीष चौधरी, मिनल-मुकेश शर्मा आदि गणमान्य लोगों ने व्यास पीठ को नमन कर शास्त्री जी से शुभाशीष प्राप्त किया ।

श्रद्धेय शास्त्री जी ने अपने कथा प्रवचन में कहा कि जो उत्साह के साथ मनाया जाये वही उत्सव है । जो वाणी, व्यवहार और विचार से सबको आनंद दे वही नंद है और जो दूसरे को यश प्रदान करे वही यशोदा है । उन्होंने कहा कि गोकुल का अर्थ गो=इंद्रियाँ और कुल=समूह अर्थात् इंद्रियों का समूह जो कि हमारा शरीर है वही गोकुल है । इंद्रियों के सुख को भोगने वाली देहरूपी नगरी मथुरा है और उस नगरी का राजा कंश था जबकि गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण का राज था । कहने का अभिप्रायः यह है कि हम अपने शरीर को गोकुल बनाये रखें जिसके लिये जरूरी है कि हमारी इंद्रिया भोग विलास में न फंसे । इन इंद्रियों का कार्य भगवान में रमण करना हो । अगर ऐसा होगा तब तो हमारा शरीर गोकुल बना रहेगा और इसमें भगवान का वास होगा अन्यथा नहीं । पं. शास्त्री ने समुद्र मंथन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जब सौलह साल की अवस्था में मनरूपी समुद्र में मंथन होता है उस समय ईश्वर का सहारा ना मिले तो अमृत की जगह विष निकल आता है । उन्होंने कहा कि राजा बलि से भगवान ने जो तीन पैर भूमि का दान मांगा उसका अभिप्राय तन-मन-धन से है । जो भी इन तीनों को ईश्वर को समर्पित कर देता है उसे ही ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है ।

आज कृष्ण जन्मोत्सव पर कथा स्थल को रंगीन गुब्बारों से सजाया गया जबकि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, वासुदेव द्वारा उन्हें नंद बाबा के घर पहुंचाने, कृष्ण जन्म पर बधाई बांटने व खुशियां मनाने के घटनाक्रम को नृत्य-नाटिका के माध्यम से इस प्रकार प्रस्तुत किया गया कि आयोजन स्थल पर भारी संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं से गोकुल और मथुरा का दृश्य उत्पन्न हो गया ।

कथा के मध्य अपनी सुरीली वाणी से भजन प्रस्तुत कर पं. शास्त्री ने भगवत प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया । पूरे कार्यक्रम का भावपूर्ण संचालन सुरेश कुमार भुवालका ने किया जबकि कथा समन्वयक श्री संदीप ने बताया कि पाचवें दिन 24 जनवरी को दोपहर 2 से 6 बजे तक पं. शास्त्री कृष्ण बाल लीला, कालिया मर्दन, गिरिराज पूजन पर कथा प्रवचन करेंगे । 25 जनवरी को रूकिमणी मंगल महोत्सव का भव्य आयोजन होगा। कथा 26 जनवरी तक चलेगी।

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