कोलकाता : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने गुरुवार को कोलकाता में डॉक्टरों से मुलाकात कर पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू न होने पर गहरी नाराजगी और दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के फैसले की वजह से बंगाल के गरीब और जरूरतमंद लोग देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। नड्डा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मैं राजनीति नहीं करना चाहता, लेकिन यह कहते हुए दुख होता है कि बंगाल के लोगों को आयुष्मान भारत की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए मैंने खुद आयुष्मान कार्ड जारी किए थे, जिन्हें यहां फाड़कर नाले में फेंक दिया गया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत गरीब परिवारों के इलाज के लिए अब तक करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कई बार आग्रह किया कि इस योजना को बंगाल में लागू किया जाए। नड्डा ने कहा कि मैंने ममता जी से कहा था कि इससे गरीबों को सीधा लाभ मिलेगा। अगर बंगाल का कोई नागरिक हिमाचल प्रदेश या किसी अन्य राज्य में काम करता है, तो वह वहां भी आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद मैं उन्हें मना नहीं पाया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि वर्ष 2017 में देशभर में व्यापक विचार-विमर्श के बाद एक नई, समावेशी और व्यापक स्वास्थ्य नीति लाई गई थी। इस नीति में इलाज, रोकथाम, उपशामक देखभाल और वृद्धावस्था से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि देशभर में अब तक 1.8 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए जा चुके हैं, हर यूनिट 3,000-4,000 लोगों के लिए उपलब्ध है। नड्डा ने कहा कि सभी केंद्रों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (NQAS) के तहत प्रमाणित किया गया है। अपने संबोधन में नड्डा ने ओडिशा और दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों ने भी पहले आयुष्मान भारत योजना का विरोध किया था, लेकिन बाद में भाजपा की सरकार बनने के बाद इसे लागू किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बंगाल में भी भाजपा की सरकार बनेगी और राज्य के लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलेगा।