कोलकाता की पहली ऐतिहासिक सजा
बाल विवाह और पॉक्सो एक्ट के तहत पहली बार एक साथ सजा
कोलकाता :
बाल विवाह और नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में एक ऐतिहासिक कानूनी फैसला आया है। शहर की सियालदह स्थित एक विशेष पॉक्सो अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 30 वर्षीय व्यक्ति को बाल विवाह प्रतिषेध कानून और पॉक्सो अधिनियम दोनों के तहत दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत सूत्रों के अनुसार, शहर के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी आरोपी को एक ही मामले में इन दोनों कानूनों के तहत एक साथ सजा भुगतने का आदेश दिया गया है।
क्या था पूरा मामला?
अदालत के मुताबिक, यह पूरा मामला साल 2025 का है और यह चितपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है। आरोपी अमित प्रमाणिक ने एक नाबालिग लड़की को अपने प्रेम जाल में फंसाया और उसकी उम्र को छिपाते हुए उससे गुप्त रूप से शादी कर ली। यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब नाबालिग पत्नी ने शहर के एक सरकारी अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के दौरान अस्पताल के दस्तावेजों से पता चला कि प्रसूता की उम्र कानूनी रूप से कम (नाबालिग) है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। चितपुर थाने की पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और दिसंबर 2025 में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जांच अधिकारी सौरव राय के नेतृत्व में पुलिस ने तेजी से जांच पूरी कर सियालदह अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अस्पताल के एक डॉक्टर समेत कई महत्वपूर्ण गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज कराई।
बचाव पक्ष और सरकारी पक्ष की दलीलें
मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि दोनों ने आपसी सहमति से प्रेम विवाह किया था, इसलिए अदालत से नरमी बरतने और रिहा करने की अपील की गई। हालांकि, विशेष सरकारी वकील असीम कुमार ने इस दलील का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत के सामने जोर देकर कहा कि ‘कानून से ऊपर कोई नहीं है’ और बाल विवाह एक गंभीर अपराध है। सोमवार को सियालदह अदालत की न्यायाधीश शरण्या सेन प्रसाद ने इस मामले में सजा का ऐलान किया। आरोपी अमित प्रमाणिक को 20 साल के सश्रम कारावास और 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में 1 अतिरिक्त वर्ष की जेल काटनी होगी। बाल विवाह कानून के तहत आरोपी को 1 साल की अतिरिक्त सजा दी गई है। इसके अलावा, संबंधित प्राधिकरण को आदेश दिया गया है कि वे पीड़िता को पुनर्वास के लिए 2 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करे।
प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा बाल विवाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। ।