सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र खोले जाने की योजना 
कोलकाता सिटी

पश्चिम बंगाल में 1,000 से ज्यादा जन औषधि केंद्र संचालित

सरकारी अस्पतालों में 469 नए केंद्र खोले जाने की योजना

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में बड़ा विस्तार होने जा रहा है। राज्य में 1,014 जन औषधि केंद्र पहले से संचालित हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में 469 और केंद्र खोले जाने की योजना है। इससे मरीजों को अस्पतालों के आसपास ही कम कीमत पर जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

उत्तर 24 परगना सबसे आगे, कोलकाता में 162 केंद्र

बीजेपी नेता अमित मालवीय ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी साझा की। ये आंकड़े 30 जून 2026 तक के हैं और राज्यसभा में केंद्र की ओर से पेश किए गए थे। आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना 203 जन औषधि केंद्रों के साथ सबसे आगे है।

इसके बाद कोलकाता में 162, जबकि हुगली और हावड़ा में 109-109 केंद्र संचालित हो रहे हैं। प्रस्तावित 469 नए केंद्र सरकारी अस्पतालों में खोले जाने हैं, जिससे मरीजों को उपचार के स्थान पर ही कम कीमत वाली दवाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में करीब 50 से 90 फीसदी तक कम कीमत पर उपलब्ध हो सकती हैं। ऐसे में इन केंद्रों के विस्तार से खासकर लंबे समय तक इलाज कराने वाले मरीजों और दवाओं पर अधिक खर्च करने वाले परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

आयुष्मान भारत से करीब 6 करोड़ लोगों को कवर का दावा

रिपोर्ट में स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख है। आयुष्मान भारत योजना हाल में बंगाल में लागू की गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अनुसार, इसके तहत करीब 1.4 करोड़ परिवार यानी लगभग 6 करोड़ लोगों को सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवरेज मिलेगा।

वहीं, आयुष्मान भारत की सूची से बाहर करीब 80 लाख परिवारों के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की है। दोनों योजनाओं के तहत लाभार्थी बंगाल के 1,240 निजी और 627 सरकारी अस्पतालों में कैशलेस इलाज करा सकेंगे। इसके अलावा देशभर के 38,604 सूचीबद्ध अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी।

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