कोलकाता सिटी

पृथक मिथिला राज्य की मांग पर मिथिलावासियों ने जंतर मंतर पर दिया धरणा

सन्मार्ग संवाददाता

नई दिल्ली / कोलकाता : पूर्व में मिथिला के राजा हुआ करते थे। जानकी मैया सीता, विद्यापति जनक, यज्ञवल्यक , मैत्रयी समेत अनेकों मनीषियों, साहित्यकारों की जन्मस्थली रही है मिथिला। स्वतंत्रता के पश्चात विभिन्न दल के राजनेताओं के द्वारा हर दृष्टिकोण से मिथिला का सर्वांगीण विकास ना होने का आरोप लगता रहा है। मिथिला के सर्वांगीण विकास के हेतु पृथक मिथिला राज्य की माँग पर संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित धरना के दौरान मिथिला के विभिन्न जिलाओं और दिल्ली समेत भारत के विभिन्न प्रांतों से प्रवासी मिथिलावासियों ने बढ़ चढ कर धरना प्रदर्शन में भाग लिया।"भीख नहि अधिकार चाही हमरा मिथिला राज्य चाही..... ' अछि सलाई मे आगि की पजरतै बिनु रगड़ने पायब निज अधिकार की बिनु झगड़ने..... ' जैसे नाड़ो से संपूर्ण वातावरण गुंज उठा।

मौके पर उपस्थित मिथिला विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक झा ने केंद्रीय सरकार और बिहार सरकार के संग मिथिला बहुल क्षेत्रों के समस्त राजनेताओं विधायकों और सांसद को ललकारते हुए कहा की मिथिला के डेढ़ करोड़ मिथिलावासियों की भावनाओ से खिलवाड़ करना और मैथिली को सीढ़ी के रुप में प्रयोग करना परे। उनका मानना है की पृथक मिथिला राज्य के निर्माण के बिना मिथिला का विकास कभी भी संभव नहीं है। झा ने ऐसे सिर फिरे लोग जो यह कहते सुने जाते की मिथिला राज्य क्यों? ऐसे लोगों से सीधा प्रश्न करते हुए कहा की फिर भारत में अनेकों राज्यों के संग केंद्रशासित प्रदेश क्यों? संपूर्ण भारत एक क्यों नहीं?

भारत में तो ऐसे ऐसे भी राज्य हैं जो की 8---10 जिलाओ को मिलाकर राज्य बनाया गया है जबकी पृथक मिथिला राज्य की माँग मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, कटिहार, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, खगड़िया, वैशाली, भागलपुर, बाँका, गोड्डा, साहेबगंज, पश्चिमी चंपारण ,पूर्वी चंपारण, देवघर, दुमका, पाकुड़, जामताड़ा, जमुई , लख्खीसराय, जैसे 30 जिलाओं को मिला कर पृथक राज्य क्यों नहीं। अशोक झा ने केंद्र सरकार से मांग किया की वे 4 मार्च 1816 को अंग्रेज के द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के गोरखा राजा के बीच हुए सिंगोली संधि के दौरान नेपाल को दिए गए बड़े भूभाग को वापस ले। उन्होंने मिथिलावासियों से अनुरोध किया कि आसन्न बिहार विधान सभा चुनाव में पृथक मिथिला राज्य पर सार्वजनिक सहमति प्रदान करने वाले नेताओं को ईवीएम में उनके द्वारा दिए गए वोट का शक्ति दिखाए।

मैथिली भारत की सांस्कृतिक राजधानी है और संस्कृत के बाद भारत की प्राचीनतम भाषा मैथिली है और इसकी अपनी लिपि है और बंगला भाषाओं के संग मिथिला की साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एकरूपता देखने को मिलती है। विदित हो की 1917 में जो भी भारत का साहित्यिक भाषा था उसको अनिवार्य रूप से कोलकाता विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति सर आशुतोष मुखर्जी ने प्रतिष्ठित किया जिसके परिणामस्वरूप हिन्दी, बंगला, मणिपुरी और आसामी भाषा के संग मैथिली को भी मैट्रिक से लेकर स्नातक तक का विषय बनाया गया साथ साथ जिन पांच साहित्यिक भाषाओं को एम0 ए o का मुख्य विषय के रूप में स्वीकृति मिला उसमें एक मैथिली भाषा को मुख्य भाषा के रूप में स्वीकृति मिला था।

धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति के के शिशिर चौधरी और संचालन प्रोफेसर अमरेन्द्र झा ने किया। धरना कार्यक्रम के दौरान मुकुंद झा, दिलीप मण्डल , मदन कुमार झा , श्रीमती सविता मिश्रा , भोला झा, मोहम्मद शाहील खान, असफाक अहमद, मोहन झा, डॉक्टर राज्यपाल झा, सोहन चौधरी, राकेश मिश्रा, पत्रकार संतोष आदि ने पृथक मिथिला राज्य की माँग का समर्थन करते हुए मिथिला राज्य की माँग को समय की माँग बताया। धरना के समापन पर सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत प्रस्तुत किया गया।

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