कोविड का असर हल्का 
कोलकाता सिटी

कोलकाता में कोविड का असर हल्का, लेकिन स्वाद-गंध जाने से बढ़ी चिंता

सांस संबंधी लक्षण हल्के, बुजुर्ग और बच्चे भी संक्रमित

कोलकाता : शहर में कोविड संक्रमण के मामलों के बीच इस बार मरीजों में बीमारी का असर अपेक्षाकृत हल्का देखा जा रहा है। हालांकि, स्वाद और गंध की क्षमता का अचानक चले जाना और तीन से पांच दिनों तक वापस न आना डॉक्टरों के लिए खास तौर पर ध्यान देने वाली बात बन गई है।

पिछले कुछ दिनों में कोलकाता के विभिन्न अस्पतालों में ऐसे मरीज सामने आए हैं, जिनमें बुखार और खांसी जैसे लक्षण हल्के रहे, लेकिन स्वाद और गंध की क्षमता काफी प्रभावित हुई।

सांस संबंधी लक्षण हल्के, बुजुर्ग और बच्चे भी संक्रमित

डॉक्टरों के अनुसार, मौजूदा संक्रमण में बुखार, खांसी, नाक बहना, गले में खराश, छाती में जकड़न और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में इनकी तीव्रता पहले की कोविड लहरों की तुलना में कम है।

हाल के हफ्तों में कुछ मरीजों को अस्पताल में भर्ती भी किया गया, जिनमें अधिकतर बच्चे और बुजुर्ग थे। हालांकि, बीमारी का स्वरूप सामान्यतः हल्का रहा। अस्पताल के विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ मरीजों में स्वाद और गंध की समस्या चार-पांच दिनों तक बनी रही।

एक मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत भी पड़ी, लेकिन वह एक सप्ताह से कम समय में ठीक हो गया। डॉक्टरों ने बताया कि जिन मरीजों में यह समस्या सामने आई, उनमें से कई को पहले से फेफड़ों से जुड़ी परेशानी थी।

वायरस नाक की नसों को सीधे नहीं करता नुकसान

विशेषज्ञों के मुताबिक, कोविड आमतौर पर गंध पहचानने वाली नसों को सीधे नष्ट नहीं करता। वायरस नाक के अंदर मौजूद उन सहायक कोशिकाओं को प्रभावित करता है, जो इन नसों को पोषण और संरचनात्मक सहयोग देती हैं।

संक्रमण के बाद होने वाली सूजन के कारण गंध पहचानने की प्रक्रिया अस्थायी रूप से बाधित हो सकती है। सहायक कोशिकाओं के दोबारा ठीक होने के साथ अधिकांश मरीजों में स्वाद और गंध की क्षमता भी लौट आती है।

डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वाद या गंध का चले जाना केवल कोविड का निश्चित संकेत नहीं है। अन्य वायरल संक्रमणों में भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं। लेकिन यदि इसके साथ बुखार, गले में खराश या सांस संबंधी परेशानी हो, तो संक्रमण को नजरअंदाज न करने और जरूरत पड़ने पर जांच कराने की सलाह दी गई है।

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