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कोलकाता सिटी

महानगर की कई आवासीय इमारतें बनीं व्यावसायिक ठिकाने

केएमसी के सर्वे में 90 फीसदी से अधिक कारोबार पर लगा ताला

मधुर, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद कोलकाता में अवैध और नियमों की अनदेखी कर चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। कोलकाता नगर निगम की ओर से कराए जा रहे सर्वेक्षण में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। केएमसी सूत्रों के अनुसार, पिछले गुरुवार से अब तक जिन स्थानों का निरीक्षण किया गया, उनमें 90 फीसदी से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद करने का नोटिस दिया गया है। केएमसी सूत्रों के अनुसार, महानगर में बड़ी संख्या में ऐसी इमारतें मिली हैं, जिन्हें मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में बिना जरूरी अनुमति के उनमें व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी गईं। सर्वेक्षण के दौरान कई जगहों पर होटल, गेस्ट हाउस, बार और रेस्तरां संचालित होते हुए पाए गए। निरीक्षण के दौरान इनमें से अधिकांश में अग्निसुरक्षा व्यवस्था में भी गंभीर खामियां मिली हैं।

करीब 300 जगहों का हुआ सर्वे

निगम सूत्रों के मुताबिक अब तक करीब 300 स्थानों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इनमें अधिकांश होटल, गेस्ट हाउस, बार, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल हैं। नियमों का उल्लंघन मिलने पर कई जगहों पर ‘क्लोजर’ नोटिस चिपकाए गए हैं। इन प्रतिष्ठानों ने वास्तव में कारोबार बंद किया है या नहीं, इसकी जांच कोलकाता पुलिस कर रही है।

पुलिस-निगम की संयुक्त टीम कर रही जांच

पिछले सप्ताह मंगलवार की देर रात मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित एक होटल में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद महानगर के होटल और गेस्ट हाउसों के दस्तावेज तथा अग्निशमन व्यवस्था की जांच के लिए पुलिस और कोलकाता नगर निगम की संयुक्त टीम गठित की गई। इसमें निगम के लाइसेंस विभाग के साथ केएमडीए और दमकल विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। महानगर के 16 बोरो में अलग-अलग टीमें लगातार मैदानी सर्वेक्षण कर रही हैं।

आवासीय इमारत में चल रहे होटल-रेस्तरां, नहीं ली जरूरी अनुमति

केएमसी सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कई जगहों पर पाया गया कि आवासीय इमारत के बड़े हिस्से का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। लेकिन इमारत के उपयोग का स्वरूप बदलने के लिए निगम से जरूरी अनुमति नहीं ली गई। कई प्रतिष्ठानों के पास दमकल विभाग की अनापत्ति प्रमाण-पत्र भी नहीं मिला। कुछ जगहों पर अग्निशमन यंत्र मौजूद थे, लेकिन वे काम करने की स्थिति में नहीं थे या उनकी वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी। ऐसे मामलों में तत्काल क्लोजर नोटिस दिया जा रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि जिन प्रतिष्ठानों में कमियां मिली हैं, उन्हें निर्धारित शर्तों को पूरा कर नए सिरे से आवेदन करना होगा। सभी दस्तावेज और सुरक्षा व्यवस्था की जांच के बाद ही दोबारा कारोबार शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।

केएमसी एक्ट को लेकर ही उठे सवाल

हालांकि निगम अधिकारियों का एक वर्ग इस कार्रवाई को लेकर कुछ कानूनी सवाल भी उठा रहा है। उनके अनुसार, निगम कानून की धारा 390(2ए) में प्रावधान है कि यदि किसी इमारत का एक कमरा भी आवासीय उपयोग में है, तो इमारत के अधिकांश हिस्से में व्यावसायिक गतिविधियां चलने के बावजूद उसे आवासीय श्रेणी में माना जा सकता है। वहीं, धारा 435ए के तहत आवासीय इमारतों में 41 तरह के कारोबार चलाने की अनुमति है और इनमें से हर कारोबार के लिए हमेशा दमकल विभाग की मंजूरी जरूरी नहीं होती।ऐसे में सवाल उठ रहा है कि किन आधारों पर किसी आवासीय इमारत को व्यावसायिक श्रेणी में चिह्नित किया जा रहा है? साथ ही, केवल दमकल की मंजूरी नहीं होने के आधार पर हर तरह के कारोबार को बंद करना कानूनी रूप से कितना उचित है, इस पर भी निगम के भीतर चर्चा शुरू हो गई है। निगम अधिकारियों के एक वर्ग का मानना है कि मौजूदा नियमों में मौजूद इन विसंगतियों को दूर करने के लिए निगम कानून में संशोधन की जरूरत है, ताकि आवासीय और व्यावसायिक उपयोग तथा अग्निसुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।

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