आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत बढ़ने पर ममता बनर्जी ने तत्काल रिहाई की मांग की। 
कोलकाता सिटी

ममता बनर्जी ने आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई की मांग की, हिरासत दो दिन बढ़ने पर भड़कीं

सीजेपी नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कार्रवाई को बताया ‘सरकार प्रायोजित आतंकवाद’, तुरंत रिहाई की मांग की

Tanisha Hirawat

कोलकाता: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए आरोप लगाया कि देशभर में पुलिस की कार्रवाई के जरिए लोकतांत्रिक आवाजों को दबाया जा रहा है। ममता ने इस कार्रवाई को ‘सरकार प्रायोजित आतंकवाद’ और ‘पुलिस प्रायोजित अत्याचार’ करार दिया। वहीं, सीजेपी ने समर्थन के लिए ममता का आभार जताया है।

हिरासत बढ़ने पर ममता का हमला

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आशुतोष और सौरव की हिरासत बढ़ाने के पीछे की मंशा हताशा को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोलकाता से दिल्ली और मुंबई तक अत्याचार अपने चरम पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र पर हमला करने के लिए एक खतरनाक तरीके का इस्तेमाल किया जा रहा है। ममता ने सरकार से युवाओं को प्रताड़ित करना बंद करने की अपील की और कहा कि सत्ता में बैठे लोग हमेशा सत्ता में नहीं रहेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में स्वतंत्रता संग्राम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शासन के दौरान भी लोगों को अत्याचारों का सामना करना पड़ा था, लेकिन वे दृढ़ संकल्प के साथ लड़े थे। ममता ने कहा कि लोकतंत्र और देश को बचाने के लिए एकजुट होकर खड़े होने वाले लोगों की अंततः जीत होगी। उन्होंने सरकार से आशुतोष रांका और सौरव दास को तुरंत रिहा करने की मांग की।

सीजेपी ने कहा- समर्थन के लिए धन्यवाद

ममता बनर्जी के बयान के बाद सीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से उनका आभार जताया गया। पार्टी ने लिखा, ‘मैम, आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।’ सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी अपने साथियों की गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि आशुतोष और सौरव की रिहाई में देरी करने के लिए कानूनी प्रक्रिया को लंबा खींचा जा रहा है। पार्टी ने हिरासत बढ़ाने के फैसले को कानूनी प्रक्रिया का मजाक बताते हुए इसे उच्च अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

क्या है पूरा मामला?

आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी है। दोनों कॉकरोच जनता पार्टी के नेता हैं। यह संगठन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल रहा है। हालांकि, इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद वहां प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि दोनों नेताओं सहित कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया, तिरंगा फहराया और नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में बदलाव से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं और इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, वे दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।

अदालत ने क्यों बढ़ाई हिरासत?

दोनों नेताओं को पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी। अब उन्हें 21 अक्टूबर तक हिरासत में रहना होगा। अदालत ने अपने आदेश में कथित तौर पर कानून का पालन न करने और निर्धारित प्रदर्शन स्थल से बाहर विरोध प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने से जुड़ी आशंकाओं का उल्लेख किया। दोनों नेताओं की ओर से पेश जमानतदारों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए।

वहीं, सीजेपी की कानूनी टीम ने कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सार्वजनिक शांति को खतरा होने के पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए। पार्टी ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती देने की बात कही है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और राजनीतिक असहमति को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल दोनों नेताओं की रिहाई और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है।

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