कोलकाता : विधानसभा की विभिन्न स्थायी समितियों के गठन को लेकर तृणमूल कांग्रेस के कालीघाट गुट ने भाजपा सरकार और विधानसभा प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया है।
गुट के नेता कुणाल घोष ने कहा कि समितियों के गठन में लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी की गई और उनके गुट को किसी भी स्थायी समिति की अध्यक्षता नहीं दी गई। उनका आरोप है कि समितियों के पदों का बंटवारा भाजपा और उसके समर्थक विपक्षी दलों के बीच किया गया।
कुणाल घोष ने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट गुट तथा संसदीय दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नेतृत्व वाले विधायकों की पूरी तरह उपेक्षा की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेता विमान बनर्जी को केवल लाइब्रेरी समिति का सदस्य बनाया गया, जबकि अशोक देव जैसे वरिष्ठ विधायक की जगह कन्हैयालाल अग्रवाल को लोक लेखा समिति (पीएसी) का अध्यक्ष बनाया गया।
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर उनका गुट विधानसभा अध्यक्ष से औपचारिक शिकायत करेगा। ममता गुट ने विधानसभा के मार्शल देबब्रत मुखर्जी के निलंबन पर भी सवाल उठाए। कुणाल घोष ने कहा कि यदि यह कार्रवाई विधानसभा अध्यक्ष की जानकारी के बिना हुई है तो इसे तत्काल वापस लिया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
वहीं, ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने कहा कि स्पीकर ही इस मामले में उचित निर्णय लेने के लिए सक्षम हैं। विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी इसे विधानसभा की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।