कोलकाता : देश की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्था 'इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन' यानी इस्का पर वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगे हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो से इसकी पूरी जांच कराने का निर्देश दिया है। यह फैसला संस्था के कामकाज और आयोजनों में पारदर्शिता को लेकर चल रहे लंबे विवाद के बाद आया है। कोलकाता के डॉ. बीरेन्द्र कुमार घोष स्ट्रीट स्थित इस्का के मुख्य कार्यालय से इस बहुप्रतीक्षित जांच की शुरुआत की जाएगी। अदालत के इस सख्त कदम से वैज्ञानिक हलकों में हलचल मच गई है, क्योंकि यह देश की सबसे पुरानी और प्रमुख विज्ञान संस्थाओं में से एक है।
शिकायतकर्ताओं ने अदालत को बताया कि कार्यकारी समिति के चुनावों में धांधली, स्वर्ण पदक निर्माण, प्रकाशन कार्यों और कार्यालय नवीनीकरण के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। हालांकि इस संबंध में पहले ही केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ-साथ सीबीआई को भी तमाम साक्ष्य सौंपे गए थे, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण मामला अदालत तक पहुंच गया। वित्तीय विवादों और अनियमितताओं के इन गंभीर आरोपों के चलते केंद्र सरकार ने इस्का को मिलने वाले आर्थिक अनुदान पर रोक लगा दी थी। फंडिंग रुकने के कारण देश का यह प्रतिष्ठित विज्ञान सम्मेलन लगातार तीन वर्षों तक स्थगित रहा, जिससे वैज्ञानिक समुदाय को भारी निराशा का सामना करना पड़ा।
इस स्थिति से परेशान होकर इस्का के आजीवन सदस्य शालीग्राम शुक्ला ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और न्याय की गुहार लगाई। इसी जनहित याचिका और साक्ष्यों के आधार पर मुख्य न्यायाधीश कृष्णा राव की पीठ ने सीबीआई जांच का यह ऐतिहासिक आदेश पारित किया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 2 सितंबर को निर्धारित की है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीबीआई की शुरुआती जांच रिपोर्ट में संस्था के भीतर चल रहे वित्तीय फेरबदल की कौन सी नई परतें खुलकर सामने आती हैं।