राम बालक, सन्मार्ग संवाददाता
बजबज : इस मानसून में भी महेशतला के बाटा इलाके के 10 वार्डों में सड़क, गलियों से लेकर घरों के अंदर तक पानी जमा हो गया है। जलजमाव की इस समस्या से इस बार भी नगरवासियों को राहत नहीं मिल पाई है। लगातार जलजमाव के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। महेशतला के तृणमूल विधायक शुभाशिस दास ने भी इस समस्या को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि नई सरकार के वित्त विभाग से मीरपुर खाल के जीर्णोद्धार से संबंधित फाइल को मंजूरी देकर आगे बढ़ाने के लिए आग्रह किया गया है। ऐसे में इस मानसून में मीरपुर खाल के जीर्णोद्धार की कोई उम्मीद नहीं है। स्वाभाविक रूप से जलजमाव की समस्या का भी समाधान नहीं हो पा रहा है। इस बार भी आम लोगों को परेशानी और तकलीफ झेलनी पड़ रही है। विधायक ने कहा कि नई सरकार को आए अभी तीन महीने ही हुए हैं। मंत्रियों को अपने-अपने विभाग को समझने और पूरी तरह कामकाज संभालने में भी कम से कम छह महीने का समय लगेगा। इसलिए सरकार को कुछ समय देना होगा। हालांकि, उन्हें जानकारी मिली है कि मीरपुर खाल के जीर्णोद्धार के पुराने प्रस्ताव में संशोधन कर इसे लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की दरों के आधार पर तैयार किया जा सकता है या नहीं, इस संबंध में वित्त विभाग ने सिफारिश की है। महेशतला नगरपालिका के 35 वार्डों में जलभराव हैं। इन वार्डों का पानी मीरपुर खाल के जरिए निकलता है। लेकिन खाल के मुहाने और जलनिकासी के रास्ते पर अलग-अलग तरीकों से अतिक्रमण हो चुका है। इसके अलावा लंबे समय से खाल की सफाई और जीर्णोद्धार नहीं होने के कारण इसमें गाद जमा हो गई है और यह उथली हो गई है। परिणामस्वरूप पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। दरअसल, मीरपुर खाल के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव पिछली सरकार के कार्यकाल में सिंचाई विभाग की ओर से वित्त विभाग को भेजा गया था। इस प्रस्ताव को लेकर काफी समय से खींचतान चल रही थी। इसी बीच राज्य में सरकार बदलने के कारण यह प्रक्रिया और भी अटक गई। संबंधित वार्डों के निवासियों का कहना है कि घर-घर में पानी जमा है। लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण सड़ांध और दुर्गंध फैल रही है। हालत यह है कि रिश्तेदारों और परिचितों को घर बुलाने में भी शर्मिंदगी महसूस होती है। शुभाशिस दास ने भी इस स्थिति को स्वीकार किया है। उनका दावा है कि उनकी सरकार के कार्यकाल में ओल्ड मणिखाल और बेगोर खाल की खुदाई का काम शुरू किया गया था। इसके बाद इन खालों से सटे कई वार्डों में जलजमाव की समस्या काफी हद तक खत्म हो ।