कोलकाता : करीब दो दशक बाद विवादित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन की प्रस्तावित कोलकाता वापसी को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद उनकी वापसी की तैयारी शुरू होने से विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। वामदल, आईएसएफ और कुछ मुस्लिम संगठनों ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।
माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने तसलीमा के आगमन को भाजपा का "राजनीतिक गिमिक" करार दिया। उन्होंने कहा कि तसलीमा भारत की नागरिक नहीं हैं। ऐसे में भाजपा की परिभाषा के अनुसार क्या उन्हें "घुसपैठिया" नहीं माना जाएगा और क्या उनका नाम एसआईआर सूची में शामिल होगा? उन्होंने कहा कि किसी विदेशी नागरिक के भारत आने या रहने का फैसला पूरी तरह केंद्र सरकार का विषय है।
वाम विधायक मुस्ताफिजुर रहमान ने कहा कि तसलीमा के कोलकाता आने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल किसी विशेष समुदाय के खिलाफ माहौल बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे भाजपा के "गुप्त एजेंडे" का हिस्सा बताया। आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से उछाला जा रहा है।
जमात-ए-इस्लामी हिंद के राज्य अध्यक्ष मसीहुर रहमान ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि बेरोजगारी, स्वास्थ्य और अन्य जनहित के मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए तसलीमा की वापसी को राजनीतिक रूप से प्रचारित किया जा रहा है।
हालांकि, पूर्व आईपीएस अधिकारी और पूर्व तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर ने तसलीमा के आगमन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से आने-जाने और अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। तसलीमा की प्रस्तावित वापसी ने एक बार फिर बंगाल की राजनीति और सामाजिक विमर्श में नई बहस छेड़ दी है।