कोलकाता : दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच कोलकाता के प्रसिद्ध कुम्हारटोली के मूर्तिकार इस साल भी बांग्लादेश जाकर दुर्गा प्रतिमाएं बनाने से दूरी बनाए हुए हैं।
कभी दुर्गा पूजा से पहले कुमारटोली के कारीगर ढाका, खुलना, जेसोर और कोमिला जैसे शहरों में जाकर स्थानीय पूजा समितियों के लिए प्रतिमाएं तैयार करते थे। लेकिन बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते अब कारीगर वहां जाने से परहेज कर रहे हैं।
सुरक्षा चिंता के कारण नहीं जा रहे कारीगर
कुम्हारटोली के कलाकारों की बांग्लादेश में काफी मांग रही है। वहां की पूजा समितियां विशेष रूप से कोलकाता की साबेकी और थीम आधारित दुर्गा प्रतिमाओं को पसंद करती हैं। कई कारीगर वर्षों से बांग्लादेश जाकर प्रतिमाएं तैयार करते रहे हैं। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में सीमा पार जाकर काम करना उनके लिए जोखिम भरा माना जा रहा है।
राजनीतिक तनाव और आवागमन से जुड़ी अनिश्चितताओं ने भी इस परंपरा को प्रभावित किया है। इसके अलावा सीमा पर सख्ती के कारण मूर्ति निर्माण में इस्तेमाल होने वाली कुछ सामग्रियों की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।
बांग्लादेश के बजाय भारत और विदेशी बाजारों पर नजर
बांग्लादेश के ऑर्डरों में कमी के बाद कुम्हारटोली के मूर्तिकार अब कोलकाता समेत देश के दूसरे शहरों और अमेरिका, ब्रिटेन तथा यूरोप से मिलने वाले ऑर्डरों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। विदेशी बाजारों में बंगाली समुदाय के बीच पारंपरिक दुर्गा प्रतिमाओं की मांग लगातार बनी हुई है। मूर्तिकारों के लिए यह बदलाव चुनौती के साथ नए अवसर भी लेकर आया है।
बांग्लादेश में काम करने की पुरानी परंपरा प्रभावित होने के बावजूद विदेशों से बढ़ते ऑर्डर कुम्हारटोली की कला की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता को दर्शाते हैं। फिलहाल कलाकार दुर्गा पूजा से पहले घरेलू और विदेशी ग्राहकों के लिए प्रतिमाएं तैयार करने में व्यस्त हैं।