सन्मार्ग संवाददाता
उत्तर हावड़ा : युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में क्षमापना दिवस पर सामूहिक खमतखामणा कार्यक्रम का भव्य आयोजन उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा योगक्षेम विहार के योगक्षेम सभागार में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने कहा— मनुष्य का भूषण रूप है, रूप का आभूषण गुण है, गुण का आभूषण ज्ञान है और ज्ञान का आभूषण क्षमा है। क्षमा चैतन्य की अनुभूति है। क्षमा जागरण की वेला है। क्षमा आभ्यन्तर तप है। दिल में आई दीवारों को सांधने का नाम क्षमापना है। क्षमापना नफरत को दूर करने का तप है। क्षमा में अद्भुत शक्ति होती है, क्षमा से परीषहों पर विजय प्राप्त की जा सकती है। क्षमा से प्रसन्नता का भाव बढ़ता है। उन्होंने आगे कहा— जैन धर्म का सर्वोच्च पर्व पर्युषण है। पर्युषण का शिखर दिन है संवत्सरी, और संवत्सरी का हार्ड है— खमतखामणा। क्षमापना कुंभ स्नान है, यह अंतःकरण शुद्धि का महत्वपूर्ण माध्यम है। यह पर्व मिथ्यात्व से सम्यक्त्व, अज्ञान से ज्ञान व राग से वैराग्य की ओर जाने का पर्व है। क्षमापना का पर्व एकमात्र जैन समाज द्वारा ही मनाया जाता है। क्षमापना का अर्थ सिर्फ क्षमा मांगना ही नहीं है, क्षमापना के अर्थ में क्षमा मांगने के साथ देना भी निहित है। आज क्षमापना दिवस है सभी लोग एक-दूसरे से क्षमापना करें यह आवश्यक है। मतभेद हो सकता है पर मनभेद नहीं रखें। मुनिश्री ने गुरु, मुनिवृंद व श्रावक-श्राविकाओं से खमतखामणा किया। श्रावक श्राविकाओं ने भी मुनिवृंद से खमतखामणा किया।
इस अवसर पर मुनि परमानंद ने कहा— जीवन के सफर में कुछ घटनाएं घट जाती हैं और मनमुटाव हो जाता है। क्षमापना दिवस उन घटनाओं को भूलकर पवित्र भावों से खमतखामणा करने का संदेश देता है।
मुनि कुणाल कुमार जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सभी से खमतखामणा किया।
महासभा के प्रधान न्यासी सुरेश जी गोयल ने सम्पूर्ण श्रावक समाज से सामूहिक खमतखामणा करवाया।
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के महामंत्री विनोद बैद, कलकत्ता सभा के अध्यक्ष शिखर चंद लुणावत, उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष संदीप डागा, तेरापंथ महिला मंडल उत्तर हावड़ा की अध्यक्षा श्रीमती सुजाता दुगड़, तेयुप उत्तर हावड़ा के अध्यक्ष बसंत पटावरी, उत्तर हावड़ा सभा के मुख्य ट्रस्टी जेठमल जी सामसुखा, सुप्रसिद्ध समाजसेवी जतन पारख आदि ने खमतखामणा करते हुए अपने भाव व्यक्त किये।
आभार ज्ञापन उत्तर हावड़ा सभा के बुद्धमल जी लुणिया ने व संचालन सभा के मंत्री विनीत कोठारी ने किया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य व समाज के लोग उपस्थित रहे।