रेस्तरां कारोबार ने बनाया नया रिकॉर्ड 
कोलकाता सिटी

दुर्गापूजा में कोलकाता के रेस्तरां कारोबार ने बनाया नया रिकॉर्ड

आठ वर्षों में सबसे शानदार बिक्री, रेस्तरां और बार की बिक्री में 25 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि

Ravi

कोलकाता : दुर्गापूजा के दौरान इस वर्ष कोलकाता के रेस्तरां, पब और बार कारोबार में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। शहर के खाद्य एवं आतिथ्य उद्योग ने पिछले कई वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

इस बार रेस्तरां कारोबार की बिक्री में पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 25 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई, जबकि पिछले सात से आठ वर्षों में सामान्य वार्षिक वृद्धि दर करीब 10 से 15 प्रतिशत रही थी। कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों के मुताबिक, अष्टमी के दिन शराब की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं होता तो बिक्री और अधिक बढ़ सकती थी।

पूजा क्षेत्र से दूर स्थित रेस्तरां को भी मिला लाभ

इस बार कारोबार में वृद्धि केवल बड़े पूजा पंडालों और प्रमुख बाजारों के आसपास स्थित प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रही। पूजा क्षेत्रों से दूर स्थित कुछ रेस्तरां को भी लाभ मिला। खास तौर पर रेड रोड पर राज्य सरकार की ओर से की गई सजावट और उत्सवी माहौल ने लोगों को आकर्षित किया।

शहर में पूजा घूमने, खरीदारी करने और परिवार के साथ बाहर भोजन करने निकले लोगों की बढ़ती संख्या ने खाद्य एवं आतिथ्य क्षेत्र को अतिरिक्त कारोबार उपलब्ध कराया।

अष्टमी के ड्राई डे का पड़ा असर

रेस्तरां उद्योग के प्रतिनिधियों का मानना है कि अष्टमी के दिन शराब की बिक्री पर प्रतिबंध के कारण पब और बार के कारोबार को कुछ नुकसान हुआ। उद्योग जगत के अनुसार, यदि उस दिन शराब की बिक्री पर रोक नहीं होती, तो कुल बिक्री और अधिक हो सकती थी।

इसके बावजूद, पूरे दुर्गापूजा काल में रेस्तरां कारोबार ने मजबूत प्रदर्शन किया और कई प्रतिष्ठानों ने पिछले वर्षों की तुलना में अधिक ग्राहकों का स्वागत किया।

कोलकाता के आतिथ्य उद्योग के लिए उत्साहजनक संकेत

इस वर्ष दुर्गापूजा के दौरान बिक्री में 25 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि, प्रमुख रेस्तरां में ग्राहकों की लंबी कतारें और लोकप्रिय खानपान केंद्रों में रिकॉर्ड कारोबार ने कोलकाता के आतिथ्य उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।

कुल मिलाकर, दुर्गापूजा 2026 कोलकाता के रेस्तरां कारोबार के लिए पिछले आठ वर्षों में सबसे सफल आयोजनों में शामिल रही। हालांकि, अलग-अलग प्रतिष्ठानों में वृद्धि की दर अलग रही, लेकिन समग्र रूप से ग्राहकों की बढ़ती संख्या और उत्सवी खर्च ने शहर के खाद्य एवं आतिथ्य कारोबार को नई गति दी।

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