राम बालक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महानगर में पेड़ों के तनों पर कील ठोंककर बैनर-पोस्टर लगाने से लेकर ड्रिल मशीन से छेद कर हुक और रस्सियां लगाने तक इंसानी लापरवाही का खामियाजा पेड़ों को भी भुगतना पड़ रहा है। इन घावों पर अब केएमसी की ‘ट्री एम्बुलेंस’ मरहम लगा रही है। खास बात यह है कि जहां फंगीसाइड असर नहीं कर रहा, वहां पेड़ों के घाव पर हल्दी का लेप लगाया जा रहा है। निगम के मुताबिक, पिछले छह-सात महीनों में ट्री एम्बुलेंस की टीम करीब 500 पेड़ों का उपचार और प्रत्यारोपण कर चुकी है।
कील से लेकर फंगस तक, पेड़ों की हर ‘बीमारी’ का उपचार
पिछले दिसंबर में नगर निगम ने एक निजी संस्था के साथ मिलकर ट्री एम्बुलेंस की शुरुआत की थी। तत्कालीन उद्यान विभाग के मेयर परिषद सदस्य और रासबिहारी के पूर्व विधायक देवाशीष कुमार की पहल पर शुरू हुई इस सेवा के जरिए बीमार, घायल और तूफान में उखड़े पेड़ों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। निगम का दावा है कि कोलकाता में इस तरह की पहल पहली बार की गई है। ट्री एम्बुलेंस की टीम पेड़ों के तनों से कीलें निकालने, फंगस, सड़न और कीटों के प्रकोप का उपचार करने के साथ पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से काटने और हटाने में भी मदद करती है। हाल में रासबिहारी एवेन्यू समेत कई इलाकों में मृतप्राय हो रहे पेड़ों को बचाने का काम शुरू किया गया है।
प्रत्यारोपण के बाद भी तीन-चार साल तक निगरानी
ट्री एम्बुलेंस की देखरेख कर रहे संजय जय सिंह के अनुसार जहां फंगीसाइड काम नहीं करता, वहां जरूरत के मुताबिक हल्दी का लेप लगाया जाता है। उनका कहना है कि पेड़ों की छाल में हुए घाव और सड़न में यह कारगर साबित हो रहा है। टीम ने लैंसडाउन में तूफान में उखड़े एक पेड़ को सर्कस मैदान में प्रत्यारोपित किया। विक्टोरिया के सामने एक पेड़ की जड़ के पास लगे फंगस का भी उपचार किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, प्रत्यारोपण के बाद भी पेड़ों की नियमित निगरानी जरूरी है। ऐसे पेड़ों का तीन-चार साल तक ऑडिट किया जाता है। जरूरत पड़ने पर कीट नियंत्रण भी किया जाता है, ताकि पेड़ों को दोबारा स्वस्थ और मजबूत बनाया जा सके।