अपनी मां के साथ छात्रा कोयल मंडल 
कोलकाता सिटी

परीक्षा के दिन पुलिस बनी फरिश्ता: दो छात्रों का भविष्य बचाने के लिए ‘ग्रीन कॉरिडोर’

सर्वे पार्क थाने की पुलिस ने बनाया 15 किलोमीट लम्बा ग्रीन कॉरिडोर

छात्र प्रियांशु प्रसाद

कोलकाता : पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं सोमवारसे पूरे राज्य में शुरू हो गयी हैं। संतोषपुर ऋषि अरबिंदो विद्यालय के आसपास भी परीक्षा को लेकर छात्रों में सामान्य तनाव का माहौल था, लेकिन दो छात्रों के लिए यह घबराहट प्रश्नपत्र को लेकर नहीं, बल्कि एक गंभीर भूल के कारण थी। उनके एडमिट कार्ड और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट घर पर छूट गए थे। सुबह लगभग 10.05 बजे सर्वे पार्क थाना की पेट्रोलिंग टीम, जिसका नेतृत्व थाना के ओसी प्रलय भट्टाचार्य और अतिरिक्त थाना प्रभारी राहुल देव बनर्जी कर रहे थे, ने दो बेहद परेशान छात्रों को परीक्षा केंद्र के बाहर खड़ा पाया । इनमें से एक सोनारपुर का रहनेवाला प्रियांशु प्रसाद था और दूसरा नरेन्द्रपुर की रहनेवाली कोयल मंडल नामक छात्रा थी। दोनों को यह अहसास हो चुका था कि बिना एडमिट कार्ड और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के उन्हें अंग्रेज़ी की परीक्षा में प्रवेश नहीं मिलेगा।

रिक्शा चालक का बेटा है मेधावी प्रियांशु

प्रियांशु के मामले में स्थिति और भी संवेदनशील थी। वह अपनी कक्षा का प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला मेधावी छात्र है। उसके पिता रिक्शा चालक हैं और मां सब्ज़ी बेचती हैं। माता-पिता के अथक संघर्ष और त्याग के बल पर प्रियांशु शिक्षा के माध्यम से गरीबी के चक्र को तोड़ने का सपना देख रहा है। वह अपने एक सहृदय पड़ोसी, रत्ना नास्कर, के साथ सार्वजनिक परिवहन से परीक्षा केंद्र पहुंचा था। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, सर्वे पार्क थाना की टीम ने तुरंत पेट्रोलिंग छोड़कर मानवीय कर्तव्य को प्राथमिकता दी। सार्जेंट डेविड टोपनो को प्रियांशु के दस्तावेज़ लाने के लिए सोनारपुर भेजा गया, जबकि एएसआई मृणाल बर्मन अपनी निजी मोटरसाइकिल से कोयल के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के लिए नरेंद्रपुर रवाना हुए। ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से शहर की भीड़भाड़ के बीच एक विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। लगभग 15 किलोमीटर की दूरी दोनों दिशाओं में रिकॉर्ड समय में तय की गई। पुलिस की मोटरसाइकिलें मानो छात्रों की मेहनत और उनके भविष्य के बीच सेतु बन गईं। कुछ ही देर में अधिकारी दस्तावेज़ों के साथ परीक्षा केंद्र लौटे। माहौल अचानक तनाव से विजय में बदल गया। दोनों छात्रों को समय रहते परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिलाया गया।एक अभिभावक ने भावुक होकर कहा, ‘यह सिर्फ काग़ज़ पहुंचाने की बात नहीं थी, यह उम्मीद पहुंचाने की बात थी।’

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