राम बालक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : मानसून की दस्तक के साथ शुक्रवार सुबह हुई भारी बारिश ने महानगर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दी। उत्तर से लेकर दक्षिण कोलकाता और उससे सटे इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। सुबह हुई बारिश के कारण सड़कों पर आम दिनों की तुलना में वाहनों की संख्या काफी कम रही। महानगर की अधिकांश सड़कों पर जलभराव की स्थिति देखने को मिली। बारिश से बचने के लिए लोगों ने कोलकाता की लाइफलाइन मेट्रो का सहारा लिया। मेट्राे में भीड़ को कारण यात्रियों को काफी परेशानी हुई। बारिश के कारण गंगा नदी का जलस्तर भी बढ़ गया था, लेकिन लॉक गेट खोलने के बाद स्थिति सामान्य हो गई। दक्षिण कोलकाता के कई इलाके सहित एमजी रोड, कॉलेज स्ट्रीट, आमहर्स्ट स्ट्रीट, पाटुआबागान और नॉर्दर्न पार्क सहित कई इलाकों में जलभराव की तस्वीरें सामने आईं। कई यात्री घंटों तक बारिश के बीच मेट्रो स्टेशनों और सड़कों पर फंसे रहे।
केएमसी ने किया युद्ध स्तर पर काम
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के जल निकासी विभाग ने युद्धस्तर पर राहत कार्य शुरू किया। बड़े-बड़े ट्रकों और पंपों की मदद से जमा पानी को निकालकर समीपवर्ती नालों और खालों में छोड़ा गया। केएमसी कर्मचारियों ने विशेष वाहनों की मदद से नालियों की सफाई कर पाइप के जरिए जल निकासी की। इसके बाद लोगों को कुछ राहत मिली। बारिश के कारण एजेसी बोस रोड पर लंबे समय तक जाम लगा रहा, जिससे यातायात पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
जलभराव वाले इलाकों का निगम टीम ने किया दौरा
कोलकाता नगर निगम की टीम ने उत्तर कोलकाता के जलभराव प्रभावित कई इलाकों का दौरा किया। निगम के एक अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि रातभर में अधिकांश स्थानों से पानी निकल गया और स्थिति सामान्य हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए निगम की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि मानसून से पहले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए कोलकाता नगर निगम प्रशासन ने बेलगछिया, रासबिहारी स्थित विवेकानंद पार्क तथा बेहला के शरत सदन में प्री-मानसून बैठकें आयोजित की थीं। हालांकि, मानसून की पहली तेज बारिश ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था और तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।