सांकेतिक तस्वीर 
कोलकाता सिटी

केएमसी की कर वसूली की रफ्तार पड़ी धीमी

अन्नपूर्णा योजना के कार्य में व्यस्त हैं कर्मचारी

राम बालक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : केएमसी में निर्वाचित नगर बोर्ड नहीं होने का असर अब राजस्व संग्रह पर भी दिखाई देने लगा है। निगम सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में संपत्ति कर संग्रह में केवल ढाई प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह वृद्धि 12 प्रतिशत से अधिक थी। इससे चालू वित्त वर्ष में निगम की राजस्व वसूली की रफ्तार को लेकर चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि इसका असर नगर निगम के कोषागार पर भी पड़ना शुरू हो गया है। संपत्ति कर नगर निगम की आय का प्रमुख स्रोत है। दूसरी ओर, विभिन्न मदों में निगम का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि आय के स्रोत सीमित हैं। ऐसे में यदि संपत्ति कर वसूली में तेजी नहीं आती है तो आने वाले दिनों में निगम पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है। प्रशासन के एक वर्ग का मानना है कि राजस्व संग्रह में शीघ्र वृद्धि नहीं होने पर नगर निगम के दैनिक खर्चों का प्रबंधन भी कठिन हो सकता है। हालांकि, नगर निगम के राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों का मानना है कि संपत्ति कर वसूली में आई कमी का सीधा संबंध निर्वाचित निगम बोर्ड के अभाव से नहीं है। उनका कहना है कि वर्तमान में संपत्ति कर वसूली से जुड़े अनेक कर्मचारी और अधिकारी अन्नपूर्णा योजना के कार्यों में व्यस्त हैं। इसके कारण वे अपने मूल दायित्व, यानी संपत्ति कर वसूली के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार बकाया करदाताओं के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जाकर मौके पर निरीक्षण करने तथा कर वसूली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए भी कर्मचारियों के पास पर्याप्त समय नहीं है। एक साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के कारण नगर निगम के कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ गया है। इसका प्रतिकूल प्रभाव संपत्ति कर वसूली पर पड़ रहा है। परिणामस्वरूप, राजस्व संग्रह की गति धीमी होने से निगम की आय और समग्र वित्तीय स्थिति दोनों प्रभावित हो रही हैं।

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