क्रेन का विकल्प तलाश रहा KMC 
कोलकाता सिटी

दुर्गा प्रतिमा विसर्जन में क्रेन का विकल्प तलाश रहा KMC

वाटर जेट और अतिरिक्त कर्मचारियों के इस्तेमाल पर विचार

कोलकाता : दुर्गा पूजा के दौरान प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था को लेकर कोलकाता नगर निगम (KMC) अब क्रेन का विकल्प तलाश रहा है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन में क्रेन के इस्तेमाल से हटकर नई व्यवस्था अपनाने की घोषणा के बाद KMC ने वैकल्पिक तरीकों पर मंथन शुरू कर दिया है।

इसके तहत अब निगम वाटर जेट से प्रतिमाओं को मौके पर ही गलाने या अतिरिक्त कर्मचारियों की मदद से विसर्जित प्रतिमाओं को नदी के किनारे तक पहुंचाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, अंतिम निर्णय से पहले इन तरीकों की व्यवहारिकता और सुरक्षा का आकलन किया जाएगा।

तीन दशक से क्रेन पर निर्भरता, अब नए विकल्पों की तलाश

KMC अधिकारियों के अनुसार, शहर के घाटों पर करीब तीन दशक से प्रतिमाओं को पानी से बाहर निकालने के लिए क्रेन का इस्तेमाल होता रहा है। यह प्रक्रिया तेज होने के साथ-साथ भारी प्रतिमाओं को संभालने में भी मददगार रही है।

कुम्हारटोली के एक मूर्तिकार के मुताबिक, अधिकांश बड़ी दुर्गा प्रतिमाओं का वजन करीब 14 टन तक हो सकता है, जबकि ऊंचाई लगभग 8 फीट रहती है। पिछले साल तक हुगली नदी के किनारे 15 से अधिक घाटों और शहर के कई तालाबों में विसर्जन की व्यवस्था थी। इसके लिए बाजे कदमतला घाट पर चार और निमतला घाट पर दो क्रेन तैनात की जाती थीं।

वाटर जेट और मैनपावर के विकल्प में सुरक्षा चुनौती

KMC के सामने एक विकल्प वाटर जेट के जरिए प्रतिमा को गलाने का है। हालांकि, इसके लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होगी। कुछ पूजा समितियां पहले प्रयोग के तौर पर इस तरीके को अपना चुकी हैं।

दूसरे विकल्प के तौर पर नदी में मौजूद कर्मचारियों की मदद से प्रतिमाओं को किनारे तक पहुंचाने पर विचार है, लेकिन इसमें कर्मचारियों की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन सकती है। KMC अब मुंबई में गणेश प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था का भी अध्ययन करेगा, ताकि वहां से कोई व्यावहारिक तरीका अपनाया जा सके।

SCROLL FOR NEXT