हावड़ा : धार्मिक आस्था का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-पाठ या परंपराओं का पालन करना नहीं, बल्कि अपने आचरण में धर्म के सिद्धांतों को उतारना है। एक आदर्श श्रावक वही है जो श्रद्धा के साथ विवेक रखे, अपने कर्तव्यों को समझे और व्यसन तथा आडंबर से दूर रहकर नैतिक जीवन जिए। यह संदेश युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने उत्तर हावड़ा में आयोजित तेरापंथ श्रावक-श्राविका सम्मेलन में दिया।
गंगा तट स्थित ‘संसारा’ परियोजना परिसर में उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा और पी.एस. ग्रुप की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में हुए कार्यक्रम में धर्मसंघ के प्रति आस्था, श्रावकों की भूमिका और नई पीढ़ी में धार्मिक संस्कारों के संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ की मजबूती में साधु-संतों के साथ श्रावक समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। श्रावक केवल धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और जीवनशैली से धर्म के मूल्यों को प्रस्तुत करने वाला सदस्य होता है। उसके जीवन में श्रद्धा, विवेक, नैतिकता और प्रमाणिकता का होना आवश्यक है। जो व्यक्ति दिखावे और आडंबर से दूर रहकर सादगी अपनाता है तथा व्यसनमुक्त जीवन जीता है, वही श्रेष्ठ श्रावक कहलाने योग्य है।
उन्होंने कहा कि देव, गुरु और धर्म के प्रति आस्था के साथ व्यक्ति को अपने आचरण की शुद्धता पर भी ध्यान देना चाहिए। धर्म का प्रभाव तभी दिखाई देता है, जब उसके सिद्धांत व्यवहार में नजर आएं। मुनि श्री ने तेरापंथ धर्मसंघ को मर्यादित संघ बताते हुए आचार्य भिक्षु के योगदान का स्मरण किया।
नई पीढ़ी तक पहुंचें धार्मिक संस्कार
मुनि श्री जिनेश कुमार ने बदलते सामाजिक परिवेश में पारिवारिक और संघीय संस्कारों को बचाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को ज्ञानशाला से जोड़ना चाहिए, ताकि उनमें बचपन से ही धार्मिक और नैतिक मूल्यों का विकास हो सके। परिवारों में नियमित धार्मिक गतिविधियों को स्थान देने और वर्ष में कम से कम एक बार गुरु दर्शन का लक्ष्य रखने की प्रेरणा भी दी।
उन्होंने अनावश्यक खर्च से बचने और संघ के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहने की बात कही। संघ को व्यक्ति के लिए विश्वास और संबल का स्रोत बताते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बिजली के केंद्र से जुड़ने पर बल्ब को प्रकाश मिलता है, उसी तरह संघ से जुड़े रहने पर श्रावक को शक्ति और ऊर्जा मिलती है। व्यक्ति और संघ एक-दूसरे की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं। इसलिए श्रावक को अपने दायित्वों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
सम्मेलन में मुनि परमानंद जी ने श्रावक और अनुयायी के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल किसी के पीछे चलना पर्याप्त नहीं है। श्रावक वह है जो व्रत ग्रहण कर अपने जीवन में अनुशासन अपनाता है। उन्होंने आत्मचिंतन का महत्व बताते हुए कहा कि दुनिया को समझने से पहले स्वयं को जानना जरूरी है।
मुख्य वक्ता प्राध्यापक निर्मल जी नौलखा ने सच्चे देव, गुरु और धर्म की पहचान करने तथा सिद्धांतों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि श्रावक को श्रद्धा और सत्यनिष्ठा के साथ विवेकपूर्ण जीवन जीना चाहिए। महासभा के प्रधान न्यासी सुरेश जी गोयल, पी.एस. ग्रुप के प्रदीप चोपड़ा और जतन पारख ने भी अपने विचार रखे।
भिक्षु भक्ति में भजनों की प्रस्तुति
सम्मेलन का दूसरा सत्र भिक्षु भक्ति को समर्पित रहा। मुंबई से आईं सुप्रसिद्ध गायिका मीनाक्षी भूतोड़िया ने भिक्षु स्वामी के भजनों की प्रस्तुति दी। उनके गायन के दौरान परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। तेरापंथ महिला मंडल की सदस्यों के मंगल संगान से भक्ति सत्र की शुरुआत हुई।
इस अवसर पर मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने भिक्षु स्वामी के जैन धर्म में विशेष स्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नाम का जाप भी ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने मीनाक्षी भूतोड़िया की गायकी की सराहना की और उनके आध्यात्मिक विकास की मंगलकामना की। मुनि कुणाल कुमार जी ने भी गीत प्रस्तुत किया। राजेंद्र पिंचा और डॉ. अरिहंत सिंघी ने भजनों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी। सुरेंद्र दुगड़, अरुण संचेती, मधु दुगड़ और सुनीता संचेती ने भी विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की शुरुआत पी.एस. ग्रुप की महिलाओं के मंगल संगान से हुई थी। पी.एस. ग्रुप के अरुण संचेती और उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष संदीप डागा ने स्वागत किया। इस दौरान विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया गया। आभार ज्ञापन पी.एस. ग्रुप की ओर से सुरेंद्र दुगड़ तथा तेरापंथ सभा की ओर से बुद्धमल लूणिया ने किया। पहले सत्र का संचालन मुनि परमानंद जी और सम्मान समारोह का संचालन सभा मंत्री विनीत कोठारी ने किया। भक्ति सत्र का संचालन भी विनीत कोठारी ने किया।