कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब संसद की प्रिविलेज कमेटी तक पहुंच सकती है। पार्टी सांसद डॉ काकली घोष दस्तीदार द्वारा वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखी गई शिकायत के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि दोनों नेता जल्द ही प्रिविलेज कमेटी में आमने-सामने हो सकते हैं।
काकली ने आरोप लगाया है कि लोकसभा के भीतर उन्हें कई बार मौखिक रूप से अपमानित किया गया तथा महिला सांसदों के प्रति कल्याण बनर्जी का रवैया असम्मानजनक रहा है। उन्होंने स्पीकर से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। संसदीय परंपरा के अनुसार, यदि स्पीकर शिकायत को गंभीर मानते हैं, तो वह मामले को प्रिविलेज कमेटी के पास भेज सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, कमेटी दोनों पक्षों को तलब कर उनके बयान दर्ज करेगी और उसके बाद अपनी रिपोर्ट स्पीकर को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर चेतावनी, निलंबन अथवा अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी की जा सकती है। दिलचस्प बात यह है कि कल्याण बनर्जी स्वयं लोकसभा की प्रिविलेज कमेटी के सदस्य हैं।
हालांकि, यदि मामला कमेटी तक पहुंचता है, तो हितों के टकराव को देखते हुए उनकी भूमिका सीमित हो सकती है। उधर, कल्याण बनर्जी ने भी काकली के खिलाफ स्पीकर से शिकायत करने की बात कही है। उन्होंने नारदा मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि काकली पर भी गंभीर आरोप हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल व्यक्तिगत टकराव नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहजता और गुटबाजी का संकेत भी है। हाल के दिनों में काकली को लोकसभा के मुख्य सचेतक पद से हटाकर कल्याण को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद से दोनों नेताओं के रिश्तों में तनाव खुलकर सामने आया है। यह घटनाक्रम अब दिल्ली से लेकर कोलकाता तक राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।