सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : जूट मिलों ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह के साथ हुई बैठक के बाद कच्चे जूट के जारी संकट के समाधान की उम्मीद जगी है। इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन (आईजेएमए) के सूत्रों के अनुसार, मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वे उनकी सिफारिशों पर विचार करेंगे। यह बैठक रविवार को सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर जूट एंड अलाइड फाइबर्स (क्रिजाफ) में हुई, जहां आईजेएमए ने जूट आयुक्त कार्यालय (जेसीओ) को पहले सौंपे गए अपने समयबद्ध आपात प्रस्ताव को दोहराया। एसोसिएशन ने मांग की कि व्यापारियों के लिए कच्चे जूट की स्टॉक सीमा को 31 मार्च तक शून्य कर दिया जाए और उपलब्ध सभी स्टॉक को अनिवार्य रूप से चालू मिलों को बेचा जाए या जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जेसीआई) को टेंडर किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को बताया कि पर्याप्त फसल अनुमान के बावजूद 25–30 लाख गांठ कच्चा जूट अब भी व्यापारियों और बिचौलियों के पास रोका गया है। इस कृत्रिम कमी के कारण कच्चे जूट की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं, जिससे मिलों को बंद करना पड़ रहा है और लगभग एक लाख श्रमिकों की आजीविका पर तत्काल खतरा मंडरा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय आपूर्ति पक्ष में पैदा हुई विकृति को दूर करने के लिए सामान्य बाजार उपायों के बजाय “असाधारण और समयबद्ध नियामक हस्तक्षेप” अपनाने के पक्ष में है।
आईजेएमए के पूर्व अध्यक्ष का बयान :
आईजेएमए के पूर्व अध्यक्ष संजय काजरिया ने कहा, “हम जूट उद्योग की चिंताओं को धैर्यपूर्वक सुनने के लिए केंद्रीय मंत्री के आभारी हैं। हमने फाइबर की उपलब्धता और बाजार में हो रही गड़बड़ियों से जुड़ी जमीनी हकीकत उनके सामने रखी है और हम सरकार, जेसीओ और जेसीआई के साथ मिलकर इस क्षेत्र को स्थिर करने तथा किसानों, श्रमिकों और राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा के लिए आवश्यक किसी भी कदम का समर्थन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने बताया कि मंत्री ने कच्चे जूट के बीजों के निर्यात की मौजूदा स्थिति के बारे में भी जानकारी ली और संकेत दिया कि आगामी बुआई सत्र पर इसके प्रभाव को देखते हुए इस मुद्दे की तत्काल जांच की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय सट्टेबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है और जल्द ही मीडिया को उन सुधारात्मक कदमों की जानकारी देगा, जिन पर विचार किया जा रहा है, ताकि आरएमएस 2026–27 सत्र के लिए जूट बैग की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।