सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन (आईजेएमए) ने श्रम मंत्री मलय घटक से आग्रह किया है कि वे कच्चे जूट की बढ़ती कीमतों और रेशा उपलब्धता के संकट को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष उद्योग की मांगें उठाएं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि सट्टेबाजी और जमाखोरी के कारण उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है, जिससे लगभग एक लाख श्रमिक तत्काल बेरोजगार हो चुके हैं। श्रम मंत्री को लिखे पत्र में आईजेएमए ने कहा कि कच्चे जूट के बाजार में गंभीर आपूर्ति असंतुलन पैदा हो गया है। जमाखोर बिचौलियों द्वारा कच्चे जूट की सट्टेबाजी के कारण इसकी कीमतें 7,500 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक हो गई हैं। आईजेएमए के अनुसार, लगभग 25 से 30 लाख गांठ कच्चा जूट बाजार में आने से रोका गया है, जिसके चलते जूट मिलों में उत्पादन घटाना पड़ा है और करीब एक लाख श्रमिकों की तत्काल बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। एसोसिएशन ने बताया कि 14 जनवरी को मंत्री मलय घटक की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान उसने केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय को एक औपचारिक प्रस्ताव सौंपा है, जिसमें कच्चे जूट बाजार को स्थिर करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
कच्चे जूट की कीमतें आसमान पर, आईजेएमए ने चेताया—उत्पादन ठप होने की कगार पर
प्रस्तावित उपायों में यह मांग शामिल है कि व्यापारियों, डीलरों और भंडारकों को 31 मार्च 2026 तक अपने पास मौजूद कच्चे जूट का भंडार शून्य करना अनिवार्य किया जाए और 1 अप्रैल 2026 से कच्चे जूट में किसी भी प्रकार के व्यापार को अवैध घोषित किया जाए। इसके अलावा, सुझाव दिया गया है कि व्यापारियों के पास बचा हुआ कच्चा जूट सरकार द्वारा निर्धारित उचित मूल्य पर जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जेसीआई) को सौंपा जाए। इसके बाद अप्रैल 2026 से मिलों को उनके ‘बी ट्विल’ (एक प्रकार की जूट बोरी) ऑर्डर के आधार पर रेशा उपलब्ध कराया जाए, ताकि उत्पादन की निरंतरता बनी रहे। आईजेएमए ने श्रम मंत्री से अपील की है कि वे श्रमिकों की आजीविका की रक्षा और पश्चिम बंगाल के श्रम-प्रधान जूट उद्योग में स्थिरता बनाए रखने के लिए इन मांगों को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाएं।