राम बालक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : जूट पर्यावरण संरक्षण का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक विकल्प है। समाज के प्रत्येक वर्ग को जूट से बने उत्पादों का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए, क्योंकि जूट पर्यावरण के अनुकूल तथा पूर्णतः जैव-विघटनशील रेशा है। यह बात नेशनल जूट बोर्ड के सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शशि भूषण सिंह ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर न्यू टाउन स्थित पटसन भवन में आयोजित चार दिवसीय जूट फेयर के उद्घाटन समारोह में कही। इस अवसर पर नेशनल जूट बोर्ड की सहायक निदेशक (एमपी एवं एसआई) मौसुमी पाण्डे, जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जेसीआई) के प्रबंध निदेशक संजय कुमार पाणिग्रही तथा उप जूट आयुक्त नीरज कुलहरि सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। आगे एनजेबी के सचिव ने कहा कि "स्वर्णिम रेशा" के नाम से प्रसिद्ध जूट आज केवल वस्त्र उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने वाले अनेक उपयोगी उत्पादों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इको-फ्रेंडली जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए जूट फेयर का आयोजन
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अधीन कार्यरत नेशनल जूट बोर्ड देश और विदेश में भारतीय जूट एवं जूट उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रहा है। इस अवसर पर नेशनल जूट बोर्ड द्वारा दो प्रमुख कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। इनमें जूट फेयर के साथ-साथ वृक्षारोपण अभियान एवं पौध वितरण कार्यक्रम भी शामिल है। "जागरूकता एवं प्रदर्शनी-सह-बिक्री मेला" के तहत पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली से जुड़े विभिन्न जूट उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है। फेयर में लगभग 10 से 12 सूक्ष्म जूट उद्यमी, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयां भाग ले रही हैं। यहां जूट हस्तशिल्प, उपहार सामग्री, आकर्षक जूट बैग, शॉपिंग बैग, वॉल हैंगिंग, होम टेक्सटाइल्स, जूट फुटवियर, फ्लोर कवरिंग, मैट एवं मैटिंग्स सहित विभिन्न उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। आयोजकों के अनुसार फेयर का उद्देश्य आम जनता को जूट एवं जूट उत्पादों के प्रति जागरूक करना तथा पर्यावरण संरक्षण में इसकी उपयोगिता से परिचित कराना है। फेयर 8 जून तक चलेगा।