कोलकाता : तारातला में 16 जिंदगियों को लील जाने वाले निर्माणाधीन गोदाम हादसे की परतें खोलने के लिए अब विज्ञान और इंजीनियरिंग का सहारा लिया जा रहा है। कोलकाता पुलिस के अनुरोध पर शनिवार को जादवपुर यूनिवर्सिटी के पांच सदस्यीय विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम ने ट्रांसपोर्ट डिपो स्थित दुर्घटनास्थल का दौरा किया। यह मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम 'फॉरेंसिक इंजीनियरिंग' पद्धति के जरिए यह पता लगाएगी कि आखिर टनों वजनी कंक्रीट और स्टील का यह ढांचा ताश के पत्तों की तरह क्यों ढह गया। यूनिवर्सिटी प्रशासन की मंजूरी के बाद गठित इस विशेष टीम में सिविल इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभागों के शीर्ष विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। टीम के निष्कर्ष ही उस तकनीकी रिपोर्ट का आधार होंगे, जिसे डेक शीट गिरने की जांच कर रही सरकारी एजेंसी और कोलकाता पुलिस को सौंपा जाएगा।
लैब और ग्राउंड जीरो पर होंगे कड़े टेस्ट
जांच टीम में शामिल कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर पार्थ प्रतिम विश्वास ने बताया कि जांच पूरी तरह से तय फॉरेंसिक इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है। उन्होंने कहा कि शनिवार का दौरा जांच का सिर्फ शुरुआती चरण था। हमने उन जगहों को चिह्नित किया है जहां से सैंपल लिए जाने हैं। कुछ टेस्ट साइट पर ही किए जाएंगे, जबकि मटीरियल के अन्य जटिल टेस्ट यूनिवर्सिटी की लेबोरेटरी में होंगे। किसी भी अंतिम नतीजे पर पहुंचने से पहले हमें इमारत के स्ट्रक्चरल डिजाइन ड्रॉइंग, डिटेलिंग और अन्य तकनीकी दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करना होगा।
बचाव कार्य पूरा होने के बाद शुरू होगा असली काम
विशेषज्ञों ने साफ किया कि शनिवार को साइट से कोई सैंपल नहीं लिया गया क्योंकि वहां अभी बचाव कर्मियों का नियंत्रण था। प्रोफेसर विश्वास ने स्पष्ट किया कि बचाव अभियान का पूरा होना और मलबे का हटाया जाना दो अलग-अलग चरण हैं। बचाव टीमों के जाने के बाद जो मलबा बचेगा, असली फॉरेंसिक जांच उसी पर की जाएगी क्योंकि कई महत्वपूर्ण टेस्ट मलबे के बीच ही संभव हैं।
मिट्टी से लेकर मटीरियल की क्वालिटी तक... हर कोने की होगी जांच
जांच टीम किसी भी जल्दबाजी या अनुमान से बच रही है। जब सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर दीपांकर चक्रवर्ती से पूछा गया कि क्या शुरुआती तौर पर मिट्टी या नींव (फाउंडेशन) में कोई कमी दिखती है? तो उन्होंने स्पष्ट इनकार करते हुए कहा कि स्ट्रक्चरल फेलियर (ढांचे के गिरने) के कई पहलू होते हैं। टीम का हर सदस्य अलग-अलग एंगल से इसका अध्ययन कर रहा है। हम मिट्टी की जांच करेंगे, डेटा जुटाएंगे और गहन विश्लेषण के बाद ही कोई आधिकारिक राय देंगे। जांच टीम मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करेगी जिसमें स्ट्रक्चरल डिजाइन में खामी, निर्माण के तरीके (कंस्ट्रक्शन मेथड), मटीरियल की क्वालिटी और सॉइल कंडीशन (मिट्टी की स्थिति) शामिल है।
आपराधिक जांच में अहम होंगे जेयू के निष्कर्ष
कोलकाता पुलिस ने जादवपुर यूनिवर्सिटी के पुराने अनुभवों को देखते हुए उनसे संपर्क किया था, क्योंकि यूनिवर्सिटी पहले भी कई बड़े ढांचागत हादसों की सफल तकनीकी जांच कर चुकी है। प्रोफेसर चक्रवर्ती ने कहा कि इस स्वतंत्र तकनीकी आकलन के जो भी नतीजे आएंगे, वे पुलिस की चल रही आपराधिक जांच और आरोपियों के खिलाफ दोषसिद्धि में बेहद अहम भूमिका निभाएंगे।