कोलकाता : बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और आंतरिक मंथन तेज होता दिख रहा है। वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद काकली घोष दस्तीदार ने पहले ही पार्टी से दूरी बनाए रखने का फैसला कर लिया है।
इसी बीच राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के हालिया बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में नयी चर्चा छेड़ दी है। रॉय ने ‘एक्स’ पर ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कई पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने समाज और शासन में “अराजकता” और “पतन” जैसे शब्दों का उपयोग किया।
उनके इन बयानों को पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब टीएमसी हालिया चुनावी परिणामों का विश्लेषण कर रही है। सूत्रों के अनुसार, रॉय ने पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली, जनभावना से दूरी और संगठनात्मक ढांचे को लेकर चिंता जताई है।
उन्होंने कथित तौर पर यह सवाल भी उठाया है कि 2024 में मजबूत संसदीय प्रदर्शन के बावजूद पार्टी को अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति का सामना क्यों करना पड़ा। इसके अलावा, आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज मामले से जुड़े आंदोलन और जनाक्रोश के दौरान पार्टी की प्रतिक्रिया को लेकर भी उन्होंने निजी चर्चा में सवाल उठाए हैं।
हालांकि रॉय ने सार्वजनिक रूप से अपनी टिप्पणियों पर विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वे पार्टी की मौजूदा स्थिति और भविष्य की दिशा को लेकर गंभीर चिंतन कर रहे हैं।
गौरतलब है कि सुखेंदु शेखर रॉय टीएमसी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में शामिल हैं और राज्यसभा में पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। उनकी हालिया टिप्पणियों ने पार्टी के भीतर संभावित मतभेदों और संगठनात्मक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है।