कोलकाता : महंगाई का असर अब सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि घर की रसोई का बजट भी इससे प्रभावित हो रहा है। रोजमर्रा के खाने में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों, खाद्य तेल और रसोई गैस की कीमतों में बदलाव के चलते शाकाहारी थाली की लागत बढ़ गई है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की औसत लागत बढ़कर 29.5 रुपये हो गई। जुलाई में यह लागत 29.1 रुपये थी। अप्रैल 2025 के बाद उपलब्ध आंकड़ों में अगस्त की कीमत सबसे अधिक रही।
प्याज की बढ़ी कीमत ने बढ़ाया थाली का खर्च
वेज थाली महंगी होने के पीछे सबसे बड़ा कारण प्याज की कीमतों में उछाल बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में प्याज की कीमत में करीब 43 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। अगस्त में प्याज का भाव लगभग 28 रुपये प्रति किलो था, जो बढ़कर करीब 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया।
महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल तथा पुराने स्टॉक को नुकसान पहुंचने के कारण सप्लाई प्रभावित हुई, जिसका असर प्याज की कीमतों पर पड़ा। इसके अलावा खाद्य तेल और एलपीजी की बढ़ती कीमतों ने भी घरेलू भोजन तैयार करने की लागत पर दबाव बढ़ाया है।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, सब्जियों, खाद्य तेल और गैस की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान लगभग 10-11 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई में आई बाधाओं और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी घरेलू बाजार पर पड़ा।
आलू-टमाटर सस्ते होने से कुछ राहत
हालांकि सभी खाद्य वस्तुओं की कीमतें नहीं बढ़ीं। कुछ सब्जियों के सस्ता होने से थाली की लागत में और अधिक वृद्धि होने से राहत मिली है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में आलू की कीमत करीब 12 फीसदी कम हुई है।
वहीं टमाटर के दाम में भी गिरावट दर्ज की गई। इस वजह से प्याज, तेल और गैस की महंगाई का असर थाली की कुल लागत पर कुछ हद तक सीमित रहा। कुल मिलाकर, रसोई में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर घरेलू बजट को प्रभावित कर रहा है।
खासकर प्याज और खाना पकाने के तेल जैसे रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान महंगे होने से आम परिवारों के खाने-पीने के खर्च पर दबाव बढ़ा है।