संदीप सरकार स्टॉल का परिदर्शन करते हुए, साथ में हैं डॉ. डी. बी. शाक्यवार व अन्य 
कोलकाता सिटी

आईसीएआर-निनफेट में चार दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा महोत्सव का आयोजन

राम बालक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईसीएआर-निनफेट), कोलकाता ने अपने परिसर में संस्थान के 88वें स्थापना दिवस के अवसर पर चार दिवसीय 'राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा महोत्सव–2026' का शुभारंभ किया। उत्सव का समापन 6 जनवरी को होगा। इस अवसर पर संदीप सरकार, अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में एडीजी (पीई) डॉ. के. नरसैया, असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट के कुलपति डॉ. बी. के. डेका, आईसीएआर-सिफरी, बैरकपुर के निदेशक डॉ. बी. के. दास, आईसीएआर-क्रीजफ, बैरकपुर के निदेशक डॉ. जी. कर, आईसीएआर–एनआरसी ऑन याक, अरुणाचल प्रदेश के निदेशक डॉ. मिहिर सरकार और आईसीएआर-अटारी, कोलकाता के निदेशक डॉ. प्रदीप दे विशिष्ट अतिथियों के रूप में उपस्थित थे। स्वागत भाषण में आईसीएआर-निनफेट के निदेशक डॉ. डी. बी. शाक्यवार ने सभी गणमान्य अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने संस्थान की विगत एक वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों को प्रस्तुत करते हुए कृषक समुदाय से नवीन एवं उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाकर सतत आजीविका की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि संदीप सरकार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत प्राकृतिक रेशा उत्पादन में विश्व का अग्रणी देश है। उन्होंने प्राकृतिक रेशा के क्षेत्र में आईसीएआर निनफेट के वैज्ञानिकों की उल्लेखनीय उपलब्धियों की सराहना की तथा आशा व्यक्त की कि यह प्रगति भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगी। साथ ही उन्होंने विकसित प्रौद्योगिकियों को वैश्विक कृषि मंच पर लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. बी. के. दास ने प्राकृतिक रेशा आधारित कृषि एवं मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में किसानों की बढ़ती रुचि पर प्रकाश डाला। डॉ. जी. कर ने जूट को "स्वर्ण रेशा" बताते हुए इसके कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में योगदान तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका को रेखांकित किया। इस अवसर पर आईसीएआर-निनफेट एट ए ग्लांस (2021–2026) एवं जूट आधारित जैव-अपघटनीय खाद विषयक वृत्तचित्र फिल्मों का विमोचन किया गया। साथ ही वार्षिक प्रतिवेदन, समाचार पत्रिका, कैलेंडर, फ्लायर्स एवं हिंदी पत्रिका देवांजलि का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम का समापन एनएनएफएफ के प्रधान वैज्ञानिक एवं आयोजन सचिव डॉ. एल. अम्मयप्पन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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