सन्मार्ग संवाददाता
खड़गपुर : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के राजभाषा विभाग एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), खड़गपुर के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी माह के शुभारंभ के अवसर पर हिन्दी निबंध लेखन प्रतियोगिता, शिक्षक दिवस विशेष व्याख्यान एवं भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। दिनभर चले इस आयोजन में खड़गपुर के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों, नराकास के सदस्य कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा IIT खड़गपुर के प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य राजभाषा हिन्दी के प्रति जागरूकता और अनुराग को बढ़ावा देने के साथ नई पीढ़ी को हिन्दी भाषा एवं साहित्य से जोड़ना तथा शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा, साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरु-शिष्य संबंधों के महत्व को रेखांकित करना था। विभिन्न आयु वर्गों और संस्थानों की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक, जीवंत और समावेशी स्वरूप प्रदान किया।
निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों से प्राध्यापकों तक की भागीदारी
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिभागियों के पंजीकरण के पश्चात हिन्दी निबंध लेखन प्रतियोगिता से हुआ। इसमें खड़गपुर के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ नराकास के सदस्य कार्यालयों के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा IIT खड़गपुर के प्राध्यापकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।
विभिन्न वर्गों में आयोजित प्रतियोगिता ने हिन्दी में मौलिक चिंतन, रचनात्मक लेखन और अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने का मंच प्रदान किया। विशेष रूप से स्कूली विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने हिन्दी के प्रति नई पीढ़ी के जुड़ाव को रेखांकित किया।
हिन्दी माह का औपचारिक शुभारंभ, शिक्षक दिवस पर विशेष व्याख्यान
निबंध प्रतियोगिता के उपरांत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हिन्दी माह का औपचारिक उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर प्रशासन, शिक्षा एवं ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं की बढ़ती भूमिका और नई पीढ़ी को भारतीय भाषाई एवं साहित्यिक विरासत से जोड़ने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए गए।
IIT खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने अपने संबोधन में भाषा, शिक्षा और ज्ञान के व्यापक संबंधों पर विचार साझा करते हुए संस्थान में हिन्दी एवं भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने भाषा को ज्ञान के प्रसार और समाज के विभिन्न वर्गों तक शिक्षा एवं विचारों की पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
इसके पश्चात प्रख्यात विद्वान डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी ने शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने शिक्षा, साहित्य, भाषा तथा समाज निर्माण में शिक्षक की भूमिका के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उनका व्याख्यान विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए प्रेरणादायी रहा।
शिक्षक दिवस कवि सम्मेलन ने बांधा समां
दिन के द्वितीय सत्र में नेताजी प्रेक्षागृह में आयोजित शिक्षक दिवस कवि सम्मेलन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। साहित्यप्रेमियों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, परिवारजनों और बच्चों की उपस्थिति में सजी इस साहित्यिक संध्या में हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार, ओज और जीवन के विविध भावों ने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता देश के वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित कवि डॉ. शिव ओम अम्बर ने की, जबकि डॉ. बलवंत सिंह ने प्रभावी एवं ऊर्जावान मंच संचालन के साथ अपनी काव्य प्रस्तुति से भी श्रोताओं को आनंदित किया।
काव्य संध्या का आरंभ युवा कवि श्री उत्कर्ष अग्निहोत्री की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुआ। उनकी रचनाओं में प्रेम, युवा संवेदनाओं और मानवीय भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति को श्रोताओं ने खूब सराहा।
डॉ. बलवंत सिंह ने प्रेम और जीवन से जुड़े प्रसंगों को हास्य एवं व्यंग्य के रंग में प्रस्तुत कर सभागार में उल्लास का वातावरण बनाया। उनकी चुटीली अभिव्यक्तियों और ऊर्जावान मंच संचालन ने कवि सम्मेलन को विशेष गति प्रदान की।
डॉ. अनु सपन ने प्रेम, जीवन और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण रचनाओं के माध्यम से साहित्यिक संध्या में भावनात्मक रंग भरे। उनकी सहज एवं संवेदनशील प्रस्तुति को श्रोताओं ने विशेष रूप से सराहा।
प्रख्यात हास्य-व्यंग्य कवि डॉ. पॉपुलर मेरठी ने अपनी विशिष्ट शैली, सहज हास्य और शब्दों के चुटीले प्रयोग से सभागार को हंसी और तालियों से भर दिया। उनकी प्रस्तुति कवि सम्मेलन के प्रमुख आकर्षणों में रही।
कवि सम्मेलन के अंतिम चरण में अध्यक्ष डॉ. शिव ओम अम्बर ने अपनी ओजपूर्ण, संवेदनशील और विचारोत्तेजक काव्य प्रस्तुति दी। अनुभव, साहित्य और जीवन-दृष्टि से परिपूर्ण उनकी रचनाओं ने वर्तमान पीढ़ी को वरिष्ठ पीढ़ी के अनुभवों एवं मूल्यों से जोड़ते हुए प्रभावशाली संदेश दिया। शिक्षक दिवस के अवसर पर उनकी प्रस्तुति एक वरिष्ठ साहित्यकार एवं मार्गदर्शक के आशीर्वचन के रूप में भी श्रोताओं के मन को स्पर्श कर गई।
हिन्दी, साहित्य और नई पीढ़ी को जोड़ने की पहल
डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी की विशिष्ट उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। प्रातःकालीन सत्र में उनके प्रेरक व्याख्यान से लेकर सायंकालीन साहित्यिक आयोजन तक प्रतिभागियों को उनके अनुभव और विद्वत्ता का लाभ मिला।
राजभाषा विभाग के प्रभारी प्रो. अशोक मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने हिन्दी माह को कार्यालयीन प्रयोग की परिधि से आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और नई पीढ़ी की सहभागिता से जोड़ा।
कार्यक्रम में हिन्दी शिक्षण योजना के सहायक निदेशक श्री प्रभात कुमार गुप्ता की विशिष्ट उपस्थिति एवं सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा।
आयोजन को मूर्त रूप देने तथा प्रातःकाल से सायंकाल तक विभिन्न गतिविधियों के प्रभावी समन्वय में वरिष्ठ हिन्दी अधिकारी डॉ. राजीव कुमार रावत एवं वरिष्ठ अनुवाद अधिकारी श्रीमती सुकन्या शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके समन्वय में निबंध प्रतियोगिता, हिन्दी माह उद्घाटन, शिक्षक दिवस विशेष व्याख्यान और कवि सम्मेलन एक सुव्यवस्थित श्रृंखला के रूप में संपन्न हुए।
कार्यक्रम की सफलता में राजभाषा विभाग के श्री सुनील एवं श्री कालीचरण सहित आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों का योगदान रहा। तकनीकी व्यवस्थाओं में NPTEL टीम, कैमरा एवं टीवी टीम, ध्वनि व्यवस्था से जुड़े सहयोगियों तथा AV Cell ने आवश्यक सहयोग प्रदान किया।
भाषा से आगे—संवाद, साहित्य और पीढ़ियों का संगम
आयोजन की विशेष उपलब्धि इसकी व्यापक सहभागिता रही। खड़गपुर के विद्यालयों से आए बच्चों और शिक्षकों से लेकर नराकास के सदस्य कार्यालयों के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा IIT खड़गपुर के प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं परिवारजनों तक सभी की सक्रिय उपस्थिति ने हिन्दी माह के शुभारंभ को एक सामुदायिक एवं सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।
विशेष रूप से सायंकालीन कवि सम्मेलन में बच्चों से लेकर वरिष्ठजनों तक विभिन्न पीढ़ियों की एक साथ उपस्थिति ने इस संदेश को सशक्त किया कि हिन्दी केवल कार्यालयीन कामकाज की भाषा नहीं, बल्कि भाव, विचार, साहित्य, संवाद और पीढ़ियों को जोड़ने वाली जीवंत भाषा है।
निबंध लेखन प्रतियोगिता से आरंभ होकर हिन्दी माह के उद्घाटन, शिक्षक दिवस विशेष व्याख्यान और भव्य कवि सम्मेलन तक पहुंचा यह आयोजन हिन्दी भाषा, साहित्य, शिक्षा और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का उत्सव बन गया। इसने राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार के साथ विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और परिवारों को एक साझा साहित्यिक एवं बौद्धिक मंच पर जोड़ने का सार्थक प्रयास किया।
IIT खड़गपुर के राजभाषा विभाग एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), खड़गपुर का यह संयुक्त आयोजन हिन्दी के प्रति संस्थागत प्रतिबद्धता, सामूहिक सहभागिता और साहित्यिक-सांस्कृतिक चेतना का प्रभावशाली उदाहरण बना।