कोलकाता : श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय की ओर से शनिवार को हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के उप निदेशक (कार्यान्वयन) डॉ. विचित्रसेन गुप्त ने की। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए अपनी भाषा के प्रति गौरव का भाव आवश्यक है।
भारत की विविधता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाए रखने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि हिंदी देश की मजबूरी नहीं, बल्कि अनिवार्यता है और इसे दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता है।
समारोह के मुख्य वक्ता महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. अमित राय ने हिंदी के समक्ष वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी को ज्ञान-विज्ञान की प्रभावी भाषा बनाने के लिए उसके तकनीकी पक्ष को मजबूत करने के साथ अनुवाद और भारतीय भाषाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना जरूरी है।
विशिष्ट अतिथि केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के भुवनेश्वर क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक डॉ. रंजन कुमार दास ने भारतीय भाषाओं के बीच पारस्परिक सौहार्द और साझा सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एकता का आधार बताया। उन्होंने सी-डैक सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा विकसित तकनीकी साधनों और अनुवाद तकनीक के माध्यम से भाषाई दूरियां कम करने पर जोर दिया।
समारोह के दौरान ‘हिंदी और राष्ट्रीय अखंडता’ विषय पर काव्य गोष्ठी भी आयोजित हुई। इसमें मीतू कानोड़िया, मौसमी प्रसाद, भारती मिश्रा, अमित अम्बस्ट और रामपुकार सिंह सहित अन्य रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। श्रोताओं ने तालियों के साथ कवियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ रमाकांत सिन्हा की सरस्वती वंदना से हुआ। पुस्तकालय के अध्यक्ष महावीर बजाज ने स्वागत भाषण दिया, जबकि संचालन डॉ. कमल कुमार ने किया। सत्यप्रकाश राय ने कल्याण मंत्र का पाठ किया। अतिथियों का स्वागत सत्यप्रकाश राय, डॉ. सी.पी. सिंह, श्रीमोहन तिवारी, परमजीत पंडित, दिव्या प्रसाद और अरविन्द तिवारी ने मुक्तामाला पहनाकर किया।
समारोह में डॉ. आर.एस. मिश्र, चन्द्रकुमार जैन, डॉ. चित्रा माली, नवीन सिंह, सुशील कुमार पाण्डेय, विनोद यादव, लक्ष्मी जायसवाल, रूद्रकांत झा, पूजा प्रसाद, विवेक तिवारी, कंचन साहा, गायत्री बजाज और अरुण सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभागार श्रोताओं से खचाखच भरा रहा।