जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस विश्वरूप चौधरी ने बीमा कंपनी को अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बहाल रखा है। ट्रायल कोर्ट ने बीमा कंपनी को दुर्घटना में हुई मौत की वजह से करीब 18 लाख रुपए बतौर मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जस्टिस चौधरी ने आदेश दिया है कि बीमा कंपनी को 17,83,600 रुपए बतौर मुआवजा देना पड़ेगा। इसके साथ ही जिस दिन क्लेम दायर किया गया था उस दिन से सात फीसदी सालाना की दर से ब्याज देना पड़ेगा। इस दुर्घटना में लालू मोल्ला की मौत हो गई थी। उसकी नाबालिक बेटी शबनम खातून सहित अन्य ने मामला दायर किया था। जस्टिस चौधरी ने आदेश दिया है कि यह रकम तीन हिस्सों में बांटी जाएगी। एक हिस्सा नाबालिक बेटी के नाम फिक्स डिपाजिट की जाएगी और बालिग होने पर उसे यह रकम मिलेगी। बीमा कंपनी के एडवोकेट का दावा था कि यह दुर्घटना मृतक की गलती के कारण हुई थी। उन्होंने इसके पक्ष में एफआईआर का हवाला दिया। इसके अलावा उनकी दलील थी कि मृतक के परिवार वाले मृतक को आय के बारे में पुख्ता सबूत नहीं दे पाए है। मृतक के परिवार की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट का दावा था की बीमा कंपनी के एडवोकेट ने ट्रायल कोर्ट में इस मामले की मेरिट पर कोई बहस नहीं की थी। बीमा कंपनी ने सिर्फ मुआवजे की रकम पर सवाल उठाया था। मृतक अब इस दुनिया में नहीं है इसलिए वह अपनी आय के बारे में कोई सफाई नहीं दे सकता है। जस्टिस चौधरी ने कहा है कि अब मेरिट के सवाल पर बहस नहीं की जा सकती है। इसलिए यह अपील खारिज की जाती है और ट्रायल कोर्ट के फैसले को बहाल रखा जाता है।