जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस जय सेनगुप्त ने एक बांग्लादेशी को मिली तीन साल की सजा में छूट देने के साथ ही शर्त लगा दी है कि जेल से रिहा होने के बाद उसे वापस बांग्लादेश जाना पड़ेगा। बनगांव के एक लोअर कोर्ट ने उसे फॉरेनर्स एक्ट के तहत तीन साल की सजा सुनाई थी। एडवोकेट घनश्याम पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि उसने हाई कोर्ट से विनती की थी कि बाकी सजा माफ करने के बाद उसे बांग्लादेश वापस भेज दिया जाए। उसकी तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट की दलील थी कि वह नाबालिग थी। पर राज्य सरकार की तरफ से सौंपे गए दस्तावेज में उसे बालिग दिखा दिया गया था। जबकि उसके बांग्लादेशी पासपोर्ट से यह साफ है कि जब यह अपराध हुआ था उसे समय वह नाबालिग थी। हालात से मजबूर होकर उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया था और कोर्ट में उसे तीन साल की सजा सुना दी थी। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट की दलील थी कि अगर वह वापस बांग्लादेश जाना चाहती है तो राज्य को कोई एतराज नहीं है। जस्टिस सेनगुप्त ने अपने फैसले में कहा है कि मौजूदा स्थिति में बस एक ही सवाल है कि वह वापस बांग्लादेश जाना चाहती है। किसी कारण बस उसने ट्रायल के समय नाबालिग होने के सवाल को नहीं उठाया था। जस्टिस सेनगुप्त ने कहा कि जब उसने डेढ़ साल की सजा भुगत ली है तो उसे और जेल में रखे जाने से कोई लाभ नहीं होगा। जस्टिस सेनगुप्त ने अपने आदेश में कहा है कि उसे सुनाई गई सजा की पुष्टि की जाती है, लेकिन उसे दी गई सजा में आधी छूट दी जा रही है।