जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : पेटीशनर विप्लव सील को प्राइमरी टीचर की नौकरी पाने के लिए करीब 13 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी है। पहले तो शिक्षा विभाग ने अवैध रूप से पैनल से बाहर कर दिया। जब मामला कोर्ट में आया तो सिंगल जज सही आदेश देने से चूक गए। जस्टिस अरिजीत बनर्जी और जस्टिस रिशद मेंडोरा के डिवीजन बेंच ने पेटीशनर को प्राइमरी टीचर के पद पर नियुक्त किए जाने का आदेश दिया है। एडवोकेट इकरामुल बारी बताते हैं कि पेटीशनर ने प्राइमरी टीचर के पद के लिए आवेदन किया था। परीक्षा और इंटरव्यू आदि के बाद शिक्षा विभाग में उसका नाम पैनल से बाहर कर दिया था। इसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट में मामला दायर किया था। एक सिंगल जज ने मामले की सुनवाई के बाद इसे वापस कमिश्नर के पास भेज दिया और कहा कि इस मामले में उपयुक्त फैसला लिया जाए। इसके खिलाफ उसने डिवीजन बेंच में अपील की थी। एडवोकेट बारी की दलील थी कि जब पेटीशनर का नाम गलत तरीके से बाहर किया गया था तो जज को इसे वापस पैनल में शामिल करने का आदेश देना चाहिए था। इसके बजाय उन्होंने इसे वापस कमिश्नर को भेज दिया था। डिवीजन बेंच ने इस मामले में कमिश्नर को रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। कमिश्नर की तरफ से दाखिल रिपोर्ट में कहा गया है कि पेटीशनर का नाम पैनल में शामिल कर दिया गया है। एडवोकेट बारी कहते हैं कि उसे 2012 से वेतन तो नहीं मिल पाएगा, क्योंकि उसने काम नहीं किया है, लेकिन बाकी सारी सुविधाएं उसे 2012 के आधार पर ही दी जाएगी। एडवोकेट बारी ने कहा कि इस तरह उसे पेंशन, पदोन्नति और ग्रेच्युटी में सुविधाएं मिल जाएगी।