जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : कर्ज लेने के बाद नहीं चुकाने पर बनता है आपराधिक मामला। इसे सिविल मामला कह टाला नहीं जा सकता है। पेटीशनर ने उसके खिलाफ दायर आपराधिक मामले को खारिज करने के लिए हाई कोर्ट में पिटीशन दायर किया था। जस्टिस उदय कुमार ने उसके पिटीशन को खारिज कर दिया। जस्टिस उदय कुमार ने हुगली सदर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि पेटीशनर के खिलाफ आपराधिक मामला चलता रहेगा। सुमना घोष की तरफ से बहस कर रहे एडवोकेट प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पेटीशनर अरिजीत बोराल की पत्नी ने सुमना घोष से 12 लाख रुपए कर्ज लिया था। जब सुमना घोष ने पैसे वापस करने को कहा तो पेटीशनर और उसकी पत्नी ने देने से इनकार कर दिया और साथ ही गुंडो के जरिए सबक सिखाने की धमकी भी दी। इसके खिलाफ उन्होंने चुचुड़ा थाने में एफआईआर दर्ज करा दिया। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद चार्जशीट दाखिल कर दिया और अब मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट की अदालत के मुकदमा चल रहा है। इसे खारिज करने के लिए बोराल ने पिटीशन दायर किया था। जस्टिस कुमार के आदेश का आशय है अगर चीटिंग के इरादे से कर्ज लिया जाए तो यह आपराधिक मामला बन जाता है। इसके साथ ही यह भी देखना पड़ेगा कि कर्ज लेने वाले की नियत क्या थी। यह कर्ज व्यवसाय और मेडिकल कारण जैसे झूठ का हवाला देते हुए लिया गया था। पति की यह दलील कि उसने कर्ज नहीं लिया था इस आधार पर नहीं टिक पाई कि रकम उनके घरेलू बैंक खाते में गई थी। जस्टिस कुमार ने मुख्य मुख्य मजिस्ट्रेट से हाई कोर्ट के आदेश से प्रभावित हुए बगैर ट्रायल को शीघ्र पुरा करने को कहा है।