जितेंद्र , सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : एक महिला ने हाईकोर्ट में हेवियस कॉरपस दायर करके आरोप लगाया था कि उसके बेटे का नाम एसआईआर के बाद मतदाता सूची से काट दिया गया है। इसके बाद उसे अवैध तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया। जस्टिस देवांशु बसाक और जस्टिस आर्यन दत्त के कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि बेटा बांग्लादेशी है और पिटीशन दायर करने वाली उसकी मां नहीं बल्कि मौसी है। इस खुलासे के बाद पेटीशनर ने मामला वापस लेना चाहा तो एडिशनल सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पिटीशन वापस लेने की अनुमति नहीं दी जाए। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की तरफ से यह खुलासा किया गया कि पेटीशनर उसकी मां नहीं है। इस बाबत राज्य की तरफ से रिपोर्ट दाखिल की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने पेटीशनर के एडवोकेट को आदेश दिया कि वह बाहर जाकर यह जानकारी ले की पेटीशनर हिरासत में लिए गए युवक की क्या बायोलॉजिकल मां है। एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड ने बाहर जाकर जानकारी लेने के बाद बताया कि पेटीशनर बायोलॉजिकल मां नहीं है। कोर्ट के सवाल के जवाब में पेटीशनर के एडवोकेट ने कहा कि वह मामला वापस लेना चाहता है। इसका विरोध करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह देश की सार्वभौमिकता का सवाल है। इसमें फर्जी एफिडेविट का अफरमेशन किया गया है। उन्होंने कहा कि वह इस सिलसिले में एफिडेविट दाखिल करना चाहते हैं। राज्य सरकार की तरफ से भी एफिडेविट दाखिल करने के लिए समय देने की अपील की गई। इसके बाद कोर्ट ने एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दे दिया। कोर्ट को जानकारी दी गई कि गिरफ्तार किए गए युवक को बांग्लादेश भेज दिया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें। इसमें यह बताना पड़ेगा की बांग्लादेश भेजे गए युवक ने किस तरह मतदाता पहचान पत्र आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों को हासिल कर लिया था।