जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : राज्य में कहीं भी बांस की जेटी वाला फेरी घाट नहीं चल पाएगा। पुलिस को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रविंद्र वी घुगे और जस्टिस ओम प्रकाश राई के डिवीजन बेंच ने यह आदेश दिया है। चीफ जस्टिस ने कहा है कि बांस की जेटी की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं में अगर एक भी जीवन बचा सकते हैं तो यह पीआईएल सार्थक हो जाएगी। चीफ जस्टिस के डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि बांस की जेटी वाले फेरी घाट से पूरे राज्य में कहीं भी नाव नहीं चलाई जा सकती है और न ही सरो सामान को इस पार उस पार किया जा सकता है। अगर कहीं भी इस तरह की फेरी घाट चलाई जा रही है तो उसके मालिक को तत्काल गिरफ्तार करना पड़ेगा। साथ ही सवाल किया है कि इस तरह के असुरक्षित फेरी घाट राज्य में कितने हैं। राज्य सरकार ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है। राज्य सरकार को इस मामले में सात अक्टूबर को एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। एडवोकेट घनश्याम पांडे ने बताया कि ऐश्वर्या गोपालकृष्णन ने यह पीआईएल दायर की है। इसमें कहां गया है कि हुगली नदी सहित पूरे राज्य में रोजाना हजारों लोग फेरी घाट से इस पार उस पार करते हैं। इसमें कहा गया है कि बांस की जेटी वाले फेरी घाट बेहद असुरक्षित है। यह दोनों तरफ से खुले रहते हैं और कभी भी लोगों के गिर जाने की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा पक्का जेटी वाले फेरी घाट पर चलने वाले स्टीमर में लाइफ़ जैकेट की समुचित व्यवस्था नहीं होती है। इस पीआईएल में जबलपुर बोट दुर्घटना और पटना बोट दुर्घटना जैसे कई मामलों का हवाला दिया गया है। चीफ जस्टिस के बेंच से फेरी घाट सेवा को सुरक्षित बनाने का आदेश देने की अपील की गई है।